ओला कैब कंपनी का घिनौना स्वरूप.. रिटायर्ड जज व उनका परिवार तक नहीं सुरक्षित.. पहले भी आये हैं कई गंभीर मामले

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में कैब कंपनी ओला का घिनौना स्वरूप सामने आया है जहाँ  12 दिसम्बर की रात एक ओला कैब ड्राइवर ने सुनसान इलाके में एक रिटायर्ड जज को लूट लिया. खबर के मुताबिक़,  रिटायर्ड जज अपने परिवार की दो महिलाओं के साथ ओला कैब से रेंटल बुकिंग करवाई थी क्योंकि ओला कैब ग्रामीण इलाकों में राइड नहीं देती है. ओला कैब चालक ने संदहा पहुँचते ही राइड कैंसिल की और जबरन 500 रूपये एक्स्ट्रा लेकर रिटायर्ड जज को उनके घर छोड़ा. इस समबन्ध में रिटायर्ड जज के पुत्र ने मुख्यमंत्री जन सुनवाई पोर्टल पर शिकायत की है, जिसे एआरएम को जांच ट्रांसफर किया गया है. रिटायर्ड जज के पुत्र ने इस सम्बन्ध में एडीजी ज़ोन और एसएसपी वाराणसी को भी ईमेल कर इस घटना की सूचना दे दी है.

ज्ञात हो कि पहले भी ओला कैब के ड्राइवर द्वारा यात्रियों के साथ दुर्व्यवहार, बदतमीजी तथा उनके साथ ठगी के कई मामले सामने आये हैं. इस बार पला कैब ड्राइवर का निशाना बने रिटायर्ड जज साहब तथा उनका परिवार, जिनके साथ ठगी की गई. रिटायर्ड जज एके तिवारी के पुत्र ने बताया कि 12 दिसम्बर 2018 को वाराणसी के जगतगंज इलाके में स्थित धूपचंडी देवी के मंदिर में परिवार का धार्मिक कार्यक्रम था, जिसके बाद मेरे माता-पिता और मेरी पत्नी को चौबेपुर स्थित पैतृक निवास पर वापस जाना था. कोई साधन उपलब्ध न होने के चलते ओला कैब बुक कराई गई. चूंकि ओला एप वाराणसी शहर से वाराणसी के ही किसी ग्रामीण इलाके में कैब बुकिंग की सुविधा नहीं देता है, इसलिए आउटस्टेशन बुकिंग की बजाय रेंटल बुकिंग करनी पड़ी.

चौबेपुर की कुल दूरी 20 किलोमीटर की है और रेंटल बुकिंग दो घंटे 30 मिनट की कराई गयी, जिसका कुल किराया रु 450/- देय हुआ. बुकिंग सौरभ नाम के ड्राईवर ने एक्सेप्ट की जिसकी माइक्रो रेंटल कार का रजिस्ट्रेशन नंबर UP65 FT 4772 और मोबाइल नंबर 7985054007 है. पहले तो सौरभ ने कॉल करके आने में असमर्थता जताई और बुकिंग कैंसिल करने को कहा, लेकिन जब उससे कहा गया कि तुम मना कर रहे हो तो बुकिंग तुम कैंसिल करो, नाहक ही कैंसलेशन चार्ज हम ग्राहक क्यों व्यय करें. इस पर उसने सिटी स्टेशन होने की बात कही और पहुंचने में देरी होने की बात कही, जबकि ओला मैप में उसकी लोकेशन उस समय पिपलानी कटरा की तरफ बता रहा था. सौरभ ने मेरे बुजुर्ग माता पिता और पत्नी को धुपचंडी देवी मंदिर के सामने से पिक किया. शहर के बाहर संदहा के पास उसने यह कहकर गाड़ी रोक दी कि वह सिटी लिमिट के बाहर आ गया है और इसके बाहर नहीं जाएगा.
अन्धेरा होता देख और साथ में दो महिलाओं के होने के चलते मेरे पिता जी सुरक्षा को लेकर चिंतित थे. जब उन्होंने उससे आगे चलने की गुजारिश की तो उसने उसी जगह पर राइड कैंसिल कर दी और कहा कि इसके अलावा उन्हें 500 रूपये देने होंगे. राइड कैंसिल करने पर टोटल रूपये 368/- का बिल आया, जिसे उसने आगे न जाने की बात कहते हुए भुगतान करने को कहा और चौबेपुर तक छोड़ने के लिए 500 रूपये और मांगे. अँधेरे में हाईवे पर दो महिला यात्रियों के साथ असहाय स्थिति में होने के चलते मेरे बुजुर्ग पिता ने उसे उसी समय Rs. 868/- का पेमेंट किया ताकि वे वहां से किसी तरह सुरक्षित चौबेपुर स्थित अपने घर पहुँच सकें. उन्होंने बताया कि इस पूरी घटना की जानकारी मेरे द्वारा ओला के ट्विटर हैंडल पर दी गई लेकिन वहां से कोई उचित रिस्पांस नहीं मिला. इस कैब का इंश्योरेंस भी दो महीने पहले समाप्त हो चुका है. इस घटना से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब ओला कैब में न्यायाधीश तक सुरक्षित नहीं है तब आदमी कितना सुरक्षित होगा?
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