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घर के किराये की फर्जी स्लिप लगाकर नहीं बचा पाएंगे टैक्स, जानें क्यों?

नई दिल्ली : अब घर के किराये की फर्जी स्लिप लगाकर अपना टैक्स बचाने वाले लोगों पर इनकम टैक्स विभाग सख्त एक्शन लेने वाला है। इनकम टैक्स अपेलेट ट्रिब्यूनल ने फैसला दिया कि आय की जांच कर रहे अधिकारी गहन जांच कर सकते हैं। वह आपसे इस बात के सबूत मांग सकते हैं कि जहां के किराए की रसीद आपने दी है, आप वहीं रहते हैं।

लोग जिस कंपनी में नौकरी करते हैं वहां से मिलने वाले हाउस रेंट के 60 फीसदी तक की रकम पर टैक्स देने से बच सकते हैं, इसके लिए उन्हें किराये की असली स्लिप लगानी होगी। ट्राइब्यूनल की एक हालिया रूलिंग के अनुसार, असेसिंग ऑफिसर अब सैलरीड एंप्लॉयी की ओर से दिखाई गई टैक्सेबल इनकम का आंकड़ा मंजूर करते वक्त सबूत की मांग कर सकता है।

वह लीज ऐंड लाइसेंस अग्रीमेंट, किराएदारी के बारे में हाउसिंग को-ऑपरेटिव सोसायटी को जानकारी देने वाले लेटर, इलेक्ट्रिसिटी बिल, वॉटर बिल जैसे सबूत मांग सकता है। आईटीएटी मुंबई ने ऐसे सैलरीड एंप्लॉयी का एचआरए इग्जेम्पशन क्लेम खारिज किया था, जिसने दावा किया था कि वह अपनी मां को रेंट पेमेंट कर रहा है।

नौकरीपेशा लोगों को आयकर अधिनियम के सेक्शन 10(13ए) के तहत मकान किराए पर छूट मिलती है। इस नियम के तहत कर्मचारी मिले किराया भत्ते (एचआरए) या बेसिक सैलरी के 50 (मेट्रो सिटी) फीसदी या 40 फीसदी (अन्य शहर) या फिर दिए गए किराए में बेसिक सैलरी का 10 फीसदी कम, इनमें जो भी सबसे कम हो, तक की छूट पा सकते हैं।

डेलॉयट हास्किंस एंड सेल्स एलएलपी के सीनियर टैक्स अडवाइजर दिलीप लखानी ने बताया कि इनकम टैक्स अपीलेट ट्राइब्यूनल की रूलिंग ने सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के क्लेम पर विचार करने और जरूरी होने पर उस पर सवाल करने के लिए आकलन अधिकारी के सामने एक मानक रख दिया है। इससे सैलरी लेने वाले पर यह जिम्मेदारी आएगी कि वह टैक्स छूट पाने के लिए नियमों का पालन करे।

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