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आज उठ जाएगा पर्दा.. किस-किसने कितना लूटा देश को

आज का दिन सुदर्शन सहित उन तमाम लोगों के अथक प्रयासों को सफलता की पहली आहुति साबित हो सकता है, जिन्होंने काले धन के खिलाफ संघर्ष किया है. केंद्र की मोदी सरकार ने 2014 के लोकसभा चुनावों में जो बड़े-बड़े वादे किये थे, उसमें काले धन को वापस लाने का वादा अहम् था. अब जब मोदी सरकार लगातार दूसरी बार सत्ता में आई है तो आज काले धन से जुडी एक अहम् जानकारी सामने आ रहे है. इसके बाद जहाँ राष्ट्र को लूटने वाले काले कुबेरों की मुश्किलें बढेंगी तो काले धन के खिलाफ संघर्ष करने वाले समाजसेवी तथा राष्ट्र की न्यायप्रिय जनता के चेहरे पर मुस्कान होगी.

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खबर के मुताबिक़, स्विस बैंक में भारतीयों के खातों में कितना पैसा जमा है, इसकी जानकारी रविवार से मिलने लगेगी. देश को किस किसने कितना लूटा है, इसकी जानकारी आज से मिलने मिलेगी. भारत और स्विटजरलैंड के बीच समझौते के बाद दोनों देश के बीच बैंकिंग सूचनाओं का स्वत: आदान-प्रदान होगा। इससे कालेधन का पता चलने की भी संभावना है. बता दें कि बीते 5 सालों में मोदी सरकार ने ब्‍लैकमनी पर नकेल कसने के लिए नोटबंदी और बेनामी प्रॉपर्टी से जुड़े कई अहम फैसले लिए. अब सरकार के दूसरे कार्यकाल में ब्‍लैकमनी को लेकर ये जो खबर आई है वो राहत देने वाली है.

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स्विस बैंकों में किन भारतीयों के बैंक खाते हैं, इस बात से आज पर्दा उठने वाला है. स्विट्जरलैंड में बैंक खाते रखने वाले भारतीय नागरिकों की जानकारी आज से टैक्स अधिकारियों के पास उपलब्ध हो जाएगी. इस कदम को लेकर केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने कहा, ‘काले धन के खिलाफ सरकार की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम है और स्विस बैंकों के गोपनीयता का युग आखिरकार सितंबर से खत्म हो जाएगा.’ सीबीडीटी आयकर विभाग के लिए नीति बनाता है. वहीं सीबीडीटी ने बताया कि भारत को स्विट्जरलैंड में भारतीय नागरिकों के साल 2018 में बंद किए खातों की जानकारी भी मिलेगी.

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सीबीडीटी का कहना है कि सूचना आदान-प्रदान की यह व्यवस्था शुरू होने के ठीक पहले भारत आए स्विट्जरलैंड के एक प्रतिनिधिमंडल ने राजस्व सचिव एबी पांडेय, बोर्ड के चेयरमैन पीसी मोदी और बोर्ड के सदस्य (विधायी) अखिलेश रंजन के साथ बैठक की. 29-30 अगस्त के बीच आए इस प्रतिनिधिमंडल की अगुआई स्विट्जरलैंड के अंतरराष्ट्रीय वित्त मामलों के राज्य सचिवालय में कर विभाग में उप प्रमुख निकोलस मारियो ने की.

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बता दें कि इसी साल जून महीने में लोकसभा में फाइनेंस पर पेश की गई स्टैंडिंग कमेटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीयों ने साल 1980 से लेकर साल 2010 के बीच 30 साल की अवधि में लगभग 246.48 अरब डॉलर से लेकर 490 अरब डॉलर के बीच काला धन देश के बाहर भेजा. स्टैंडिंग कमेटी ने तीन अलग-अलग दिग्गज संस्थानों-एनआईपीएफपी, एनसीएईआर और एनआईएफएम के अध्ययन के आधार पर यह जानकारी दी थी.

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