कई एजेंट आत्महत्या तक कर चुके हैं शारदा चिटफंड घोटाले में.. जानिये उस घोटाले का विवरण जिसने हिला दी देश की राजनीति और ले लिए कई प्राण

उस घोटाले का नाम आते ही पुलिस कमिश्नर तक हिल जाते हैं और उसकी जांच के दायरे में आ जाते हैं , उसका नाम आने के बाद मुख्यमंत्री धरने पर बैठ जाती हैं और उनके पीछे पूरा का पूरा विपक्ष खड़ा हो जाता है .. आखिर वो कौन सी बला है जिसके चलते बगावत जैसे हालात बन चुके हैं एक राज्य में . यहाँ बात चल रही है शारदा चिटफंड घोटाले की जो बन गया है पश्चिम बंगाल की सत्ता के गले की ऐसी फांस जो न निगलते बन रही है और न ही उगलते .

शारदा समूह द्वारा 10 लाख से अधिक निवेशकों को ठगने का अनुमान है. इस घोटाले से 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने की संभावना है. अप्रैल में बालासोर और ओडिशा में सैकड़ों निवेशकों ने समूह पर आरोप लगाया था कि उच्च लाभ का वादा कर उनसे पैसा लिया गया था, जिसे पूरा नहीं किया गया. इसके बाद ओडिशा में इस मामले की जांच शुरू हुई थी. कथित तौर पर तीन हजार करोड का ये घोटाला अप्रैल 2013 में सामने आया था. आरोप है कि शारदा ग्रुप की कंपनियों ने गलत तरीके से निवेशकों के पैसे जुटाए और उन्हें वापस नहीं किया. घोटाले के खुलासे के बाद जब एजेंटों से निवेशकों ने पैसे मांगने शुरू किये तो कई एजेंटों ने जान तक दे दी थी.

दरअसल, रोज वैली स्कैम 15000 करोड़ रुपए और शारदा चिट फंड में 2500 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है. इसमें कई बड़े नेताओं का नाम भी शामिल होने की बात सामने आ चुकी है..रोज वैली चिटफंड घोटाले में रोज वैली ग्रुप ने लोगों 2 अलग-अलग स्कीम का लालच दिया और करीब 1 लाख निवेशकों को करोड़ों का चूना लगा दिया था. आशीर्वाद और होलिडे मेंबरशिप स्कीम के नाम पर ग्रुप ने लोगों को ज्यादा रिटर्न देने का वादा किया. जिसके बाद लोगों ने भी इनकी बातों में आकर इसमें निवेश कर दिया. ग्रुप एमडी शिवमय दत्ता इस घोटाले के मास्टरमाइंड बताए जाते हैं.

इस मामले में सीएम ममता बनर्जी ने भी सीबीआई का विरोध करते हुए मोदी सरकार पर निशाना साधा। घटना के बाद बंगाल की मुख्यमंत्री धरने पर भी बैठ गईं।  कमिश्नर राजीव कुमार से सीबीआई दो मामलों के संबंध में पूछताछ करने के लिए पहुंची थी। यह दो मामले चर्चित शारदा चिटफंड घोटाला और रोज वैली चिट फंड घोटाला था। दरअसल सीबीआई मामले में सबूत से जुड़े कुछ दस्तावेजों से जुड़े मामले की जांच के संबंध में कमिश्नर राजीव कुमार के पास पहुंची थी। सीबीआई अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में राजीव कुमार को कई नोटिस भी दिए गए लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

अमेरिकी पत्रकार जेनेट लेवी के लिखे एक लेख में बताया गया है कि कैसे संदिग्ध आतंकवाद समर्थकों को ममता बनर्जी संसद में भिजवा रही हैं। जून 2014 में ममता बनर्जी ने अहमद हसन इमरान नाम के एक कुख्यात जिहादी को अपनी पार्टी के टिकट पर राज्यसभा सांसद बनाकर भेजा। हसन इमरान प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिमी का सह-संस्थापक रहा है। आरोप है कि उसने शारदा चिटफंड घोटाले का पैसा बांग्लादेश के जिहादी संगठन जमात-ए-इस्लामी तक पहुंचाया, ताकि वो बांग्लादेश में दंगे भड़का सके।

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