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नई दिल्ली : 9 साल के इंतजार के बाद आज से रीयल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट एक्ट लागू हो गया है। जिसके वजह से बिल्डर नहीं अब खरीदार ही ज़मीनों का बिल्डर बन गए है। यह कानून पिछले साल मार्च में संसद में पास हुआ था। इस कानून के ज़रिए अब खरीदार बिल्डर की मनमानी के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते है। आरईआरए के लागू होने से हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में पारदर्शिता बढ़ेगी। लेकिन यह पारदर्शिता केवल 13 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने ही लागू करने की अधिसूचना जारी किया है।

जबकि इस रेरा को एक मई से सारे देश में लागू करने की बात तय किया गया था। इस रेरा के तहत केंद्रीय आवास मंत्री वेंकैया नायडू का कहना है कि यह कानून इस क्षेत्र का नियमित करेंगे। न कि उसका वजूद को खत्म करना होगा। नायडू ने यह बात इसलिए इतनी सफाई से बोली है क्योंकि बिल्डर का कहना है कि नई व्यवस्था बाकी पेज 8 पर उनका वजूद को बचना ना मुमकिन रहेगा। ऐसा लगता है कि इस रेरा कानून के तहत भारतीय रियल एसटेट क्षेत्र में खरीदारों के लिए नई जान फूंक दी है।

इस रेरा कानून में बदलाव आने से बिल्डरों को ज़्यादा खरीदार मिलेंगे और ज़्यादा खरीदार मिलने से रियल एसटेट के बाजार तरक्की होगी और साथ ही इस कानून के बाद खरीददार किंग बन जाएगें। इस कानून को लेकर नारेडको के चेयरमैन राजीव तलवार ने कहा कि यह रियल एस्टेट क्षेत्र में बड़ा बदलाव है जिससे उन खरीदारों का बचाव होगा जो पहले से ही फ्लैट खरीद चुके है। रेरा के तहत नियामक को वर्तमान परियोजनाओं को पूरा करने में मदद पहुंचाने और मकान खरीदारों की राहत देने के तरीके खोजने चाहिए।

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