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फी पर बैंकों की मनमानी के लिए दखल दे सकता है RBI

नई दिल्ली : एसबीआई ने पिछले महीने 1000 से 10,000 तक मिनिमम बैलेंस मेंटेन करने के लिए कहा है। अगर ग्राहक मिनिमम बैलेंस मेंटेन नहीं कर पाए तो ग्राहकों को पेनल्टी देनी होगी। इस पेनल्टी की वजह से सोशल मीडिया पर बहस शूरू हो गई। लोगों का कहना है कि हमारे बैंक हमें अब डरा रहें है। सोशल मीडिया पर उठाने वाले कई तूफान की तरह यह मामला शांत हो गया है, लेकिन पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। क्योंकि अभी तक बैंको को लोगों की नाराजगी का सामना नहीं करना पड़ा है्।

ऐसा लग रहा है कि इसमें सरकार और ग्राहक एक तरफ है। सरकार नोटबंदी के चलते टैक्स कंप्लायंस से मिलने वाला फायदें को गंवाना नहीं चाहती। ग्राहकों को लग रहा है कि बैंक उनके साथ ज्यादती कर रहे हैं, जबकि उनका डिपॉजिट बैंकों के बिजनेस की बुनियाद है। इस मामले से वे वेंडर्स भी जुड़े हैं, जो तकनीक मुहैया कराते हैं और जिनकी वजह से कई सेवाएं संभव हुई है। ऐक्सिस बैंक के रिटेल हेड राजीव आनंद ने बताया कि हम सिर्फ यह कह रहे हैं कि हमने जो नेटवर्क तैयार किया है, उसकी कुछ लागत है।

गौरतलब है कि बैंक ग्राहकों से कई तरह की फी वसूलते है। इसमें से एक मिनिमम बैलेंस मेंटेन नहीं करने पर लगने वाला जुर्माना। वहीं, जब भी हम किसी मर्चेंट के यहां डेबिट कार्ड स्वाइप करते हैं तो उस पर भी एक चार्ज देना होता है। इसके साथ ही एटीएम से तय सीमा से अधिक बार पैसा निकालने पर भी आप पर जुर्माना लगता है। अगर आप अपने अकाउंट से पैसा ट्रांसफर करते है तो बैंक उस पर फी वसूलते है। क्रेडिट कार्ड हो या डेबिट कार्ड, बैंक इनसे या तो कस्टमर से चार्ज वसूलते है या दुकानदार से। इन इन्फ्रास्ट्रक्चर को तैयार करने पर पैसा खर्च किया जाता है।

इस इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार करने और मेंटेन करने में कई पक्ष लगे हुए है। वीजा और मास्टर कार्ड जैसी कंपनियां भी इसमें स्टेकहोल्डर है। अगर उन्हें इन सेवाओं के बदले भुगतान नहीं मिलेगा तो उनका बिजनेस बंद हो जाएगा। देश की सबसे बड़ी पेमेंट गेटवे कंपनी बिलडेस्क के डायरेक्टर एम एन श्रीनिवासु ने कहा कि अगर एमडीआर जीरो हो जाता है तो इस बिजनेस में रहने का कोई मतलब नहीं होगा। हमें वजूद बचाए रखने के लिए कस्टमर डेटा से पैसा बनाने के बारे में सोचना पड़ेगा। अभी तक हम डेटा को एनक्रिप्टेड और सेफ रखते आए है।

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