भारत में इस्लामिक बैंक की आहट पर सबसे पहला विरोध था सुदर्शन का . शानदार रहा अंजाम जब मंसूबे हुए पस्त

क्या पैसे का भी मजहब होता है . शायद कतई नहीं , फिर भारत में इस्लामिक बैंक क्यों और किस आधार पर . जैसे ही इसकी आहट आई थी ठीक उसी समय सुदर्शन न्यूज ने इसका मुखर विरोध किया और अब इसमें आया है बेहद महत्वपूर्ण फैसला . विदित हो कि एक बडे कदम के तहत रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने देश में इस्लामिक बैंक लाने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करने का निर्णय लिया है । दूसरे शब्दों में कहा जाए तो अब RBI ने इस इस्लामिक बैंक के सिद्धांत को नकार दिया है और इसके साथ ही सुदर्शन न्यूज़ के एक और आगाज़ का शानदार अंजाम हुआ है .  

सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी में केंद्रीय बैंक ने कहा कि, सभी नागरिकों को बैंकिंग और अन्य वित्तीय सेवाओं की ‘विस्तृत और समान अवसर’ की सुलभता के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया ।इस्लामिक या शरिया बैंकिंग ऐसी वित्तीय व्यवस्था है जो सूद नहीं लेने के सिद्धांत पर चलती है क्योंकि सूद लेना इस्लाम में हराम है । आरटीआई के जवाब में कहा गया है कि, भारत में इस्लामिक बैंक लाने के मुद्दे पर रिजर्व बैंक और सरकार ने विचार किया ।

समाचार एजेंसी पीटीआई के एक संवाददाता की ओर से दायर आरटीआई में कहा गया, ‘चूंकि सभी नागरिकों को बैंकिंग और फाइनैंशल सर्विसेज विस्तृत और समान रूप में उपलब्ध हैं, इसलिए प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया गया है ।’ आरबीआई से देश में इस्लामिक या ‘ब्याज मुक्त’ बैंकिंग व्यवस्था कायम करने के लिए उठाने जानेवाले कदमों की जानकारी मांगी गई थी । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सभी परिवारों को व्यापक वित्तीय समावेशन के दायरे में लाने के लिए २८ अगस्त २०१४ को एक राष्ट्रीय मिशन जन धन योजना का शुभारंभ किया था ।

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