मनी लॉन्ड्रिंग में फंसे बैंकों को ट्राइब्यूनल से मिली राहत की सांस…

देश भर में मनी लॉन्ड्रिंग यानि काले धन को वैध बनाने के लिए कई तरह के पैंतरे इस्तेमाल किये जाते है। मनी लॉन्ड्रिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा आपराधिक आय को वैध बनाकर दिखाया जाता है फिर उन्ही पैसों को नशीली दवाइयों की सौदेबाजी और भ्रष्टाचार जैसे आपराधिक मामलो में इस्तेमाल किया जाता है।

गौरतलब है कि मनी लॉन्ड्रिंग की मदद करने में हमारे देश के सरकारी बैंक भी शक के दयारे में है। ज्ञात हो कि चार साल पहले वेब पोर्टल द्वारा कई सरकारी बैंको पर मनी लॉन्ड्रिंग कि मदद करने का आरोप लगाया गया था। उस पोस्ट में इन बैंको की तरफ से मनी लॉन्ड्रिंग करने का दवा किया गया था लेकिन ट्राइब्यूनल द्वारा उन बैंको में लगाए गए सारे आरोप को ख़ारिज कर दिया गया है।

खबर के मुताबिक, प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट के तहत काम करने वाले अपीलेट ट्राइब्यूनल ने 88 पेज के अपने आदेश में इन बैंकों पर लगाए गए सभी जुर्मानों को माफ़ कर दिया। ट्राइब्यूनल का कहना है कि सरकार द्वारा जाँच कार्यवाही की प्रक्रिया में एफआईयू बैंकों के खिलाफ आरोपों की जांच करने में नाकामयाब रही और वह केवल इलेक्ट्रॉनिक सबूत पर भरोसा करती रही, जिसे कानून के मुताबिक देखा जाये तो स्वीकार नहीं किया जा सकता था।

ट्राइब्यूनल का यह भी कहना है कि एफआईयू ने आदेश को जारी करने से पहले एडिटेड टेपों और ट्रांसक्रिप्ट्स से अलग कोई जांच नहीं की है, यहाँ तक कि एफआईयू को अब तक पूरे और अनएडिटेड टेप्स नहीं मिले हैं। ऐसे में ऑनलाइन अपलोड की गई टेप को स्वीकार नहीं किया जा सकता और यह कानून के तहत अधिकृत नहीं हैं। 

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