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जैसे असहिष्णुता के खिलाफ उठे थे वैसे अब मॉब लिंचिंग के खिलाफ भी इकट्ठा… फिर वही बुद्धिजीवी फिर वही बॉलीवुड

देश में एक बार फिर से वही माहौल पैदा करने की कोशिश की जा रही है जो असहिष्णुता की आड़ में देश को देश को बदनाम करने को खड़ा किया गया था. मुद्दा वही है, लोग वही है..बस परिभाषा बदल दी है. उस समय असहिष्णुता का हवाल दिया गया था तो अब मॉब लिंचिंग का हवाला दिया जा रहा है. वही तथाकथित बुद्धिजीवी, वही बॉलीवुड एक बार फिर से मॉब लिंचिंग की आड़ लेकर सक्रीय हो रहा है तथा उनके निशाने पर वही लोग हैं जो असहिष्णुता को लेकर थे.

एकतरफ जहाँ देश में मॉब लिंचिंग को लेकर राजनैतिक घमासान मचा हुआ है तो तो वहीं लीवुड से भी इसके खिलाफ आवाज उठने लगी है. गीतकार जावेद अख्तर और निर्देशक सुधीर मिश्रा समेत बॉलीवुड की कई हस्तियों ने मॉब लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं पर मंगलवार को अपनी नाराजगी जाहिर की. इन बड़ी हस्तियों ने मॉब लिंचिंग के शिकार और पीड़ितों के लिए न्याय की मांग की है. गीतकार जावेद अख्तर ने कहा कि भीड़ द्वारा की गयी हिंसा की घटनाओं को ‘ऐसी बेशर्म धृष्टता’ से न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता. वरिष्ठ गीतकार ने ट्विटर पर कहा कि अमेरिका में कू क्लक्स क्लान (अमेरिका में कट्टरवादी दक्षिण-पंथी गोपनीय समाज) और गुलामी के दिनों या दक्षिण अफ्रीका में श्वेत प्रभुत्व शासन के चरम काल में भी किसी ने ऐसी बेशर्म धृष्टता से भीड़ हत्या को न्यायोचित नहीं ठहराया. निर्देशक सुधीर मिश्रा ने कहा कि भीड़ द्वारा की गयी हत्या को जायज ठहराने वाले अपने बच्चों से क्या कहेंगे?

फिल्मकार और पूर्व पत्रकार प्रीतीश नंदी ने कहा कि भीड़ द्वारा हत्या किये जाने को खड़े होकर देखने वाले पुलिसकर्मियों को क्या महज निलंबित या स्थानांतरित किये जाने के बजाये कड़ी सजा नहीं मिलनी चाहिए? इन लोगों को निर्दोष लोगों की रक्षा करनी चाहिए, उनकी हत्या में मदद नहीं करनी चाहिए. अभिनेता और स्टैंड-अप कामेडियन वीर दास ने ट्वीट किया कि भीड़ द्वारा यहां हत्या के शिकार लोगों को न्याय दिलाने के लिये एक व्यक्ति किसे गले लगाये? अभिनेत्री गौहर खान ने ट्वीट किया कि राज्य के नेता हत्याओं के बारे में बेहद हल्के बयान देते हैं, जैसे यह चेन छीनने की कोई घटना हो. देश के नेता इस पर चुप्पी साधे रहते हैं, लेकिन भीड़ द्वारा हत्या असल में हत्या के लिए नया अनौपचारिक शब्द बन गया है. लेकिन आपको बता दें कि ये आवाज अलवर की घटना को लेकर उठी थी लेकिन जैसे ही बाड़मेर की घटना सामने आयी तो तुरंत ये आवाजें कुंद भी हो गयीं.

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