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नरेन्द्र मोदी और उनके समर्थको से अथाह चिढ थी कादर खान को. उसी चिढ में उन्होंने अनुपम खेर के लिए कभी बोले थे ये शब्द

आख़िरकार फिल्म जगत के कभी खलनायक रहे तो बाद में कामेडियन बने कादर खान ने दुनिया को अलविदा कह दिया . फिल्म जगत के तमाम अभिनेता और अदाकारा उनके मृत्यु पर शोक मना रहे हैं और कहना गलत नहीं होगा कि फिल्म जगत के लिए उनके पाश्चात्य नये साल का जश्न फीका पड़ गया है . लेकिन यहाँ पर कादर खान के जीवन से जुड़ा एक पहलू ऐसा भी है जिसको बहुत कम लोग जानते होंगे. ये पहलू जुड़ा था भारत एक प्रधानमन्त्री मोदी और उनके समर्थको से .

न जाने कौन सी चिढ थी वो और न जाने क्या मानसिकता थी वो . निश्चित तौर पर दुनिया में भारत की लोकप्रियता के आधार स्तम्भ बने नरेन्द्र मोदी को जब डोनाल्ड ट्रम्प और व्लादिमीर पुतिन जैसे महादिग्गाज आगे बढ़ कर गले लगा रहे थे तब भारत में ही उनके खिलाफ चिढने वाले लोगों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा था . उन्ही में से एक थे कादर खान . जब पदम् श्री अवार्ड की लिस्ट में उनका नाम नहीं आया तब उनका एक बयान सुर्खियों में रहा था . उस समय उनके निशाने पर आ गये थे कश्मीरी हिन्दुओ की आवाज उठाते फिल्म अभिनेता अनुपम खेर . अनुपम खेर , उदित नारायण , अजय देवगन आदि को जिस वर्ष पद्म पुरष्कार मिले थे उसी साल कादर खान ने कड़ा विरोध जताया था .

कादर खान ने तब कहा था कि न जाने क्या मापदंड हैं वर्तमान सरकार के किसी को पुरष्कृत करने के , उनके हिसाब से पहली सरकारों ने जो इनाम बांटे थे तब ईमानदारी हुआ करती थी लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार में बंटे पुरष्कारों में कोई नियम कानून नहीं देखे गये थे . उन्होंने तो हिन्दुओ की आवाज उठाने वाले अनुपम खेर को सीधे सीधे निशाने पर लिया था और कहा था कि उन्हें समझ में नहीं आता कि अनुपम खेर ने ऐसा क्या कर दिया जो उन्हें पदम् पुरष्कार दिया गया है . उनके अनुसार अनुपम खेर ने सिर्फ और सिर्फ नरेन्द्र मोदी का गुणगान किया है और शायद उन्हें इसी का इनाम मिला है . जबकि असल में अनुपम खेर की कलाकारी को सबने सराहा था लेकिन कादर खान का ये बयान उनके मोदी समर्थको के खिलाफ एक गुस्से को दर्शाता है. उन्होंने उन पुरष्कार पाने वालों का कभी भी विरोध नहीं किया था जिन्होंने पूरी दुनिया में भारत की छवि गिराने की कोशिश करते हुए अपने इनामो को लौटाया था . ये चर्चा हो रही है वर्ष २०१६ के समय की जब कुछ तथाकथित बुद्धिजीवियों द्वारा दिया गया असहिष्णुता का नारा अपने चरम पर था .

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