इंस्पेक्टर सुबोध के लिए ढोंग करते नसीरुद्दीन शाह क्यों नहीं मांग रहे नबी अहमद की मॉब लिंचिंग के शिकार सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह की रिहाई ?

बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह हो अब हिंदुस्तान में डर लगने लगा है. कल से मीडिया की सुर्ख़ियों में नसीरुद्दीन शाह तथा उसका वो बयान छाया अहा है जिसमें वह कह रहा है कि हिंदुस्तान में असहनशीलता बढ़ रही है, नफरत बढ़ रही है. अपने डर को बयां करते हुए नसीरुद्दीन शाह ने कहा है कि कभी भी उसके बच्चों को भीड़ घेरकर पूंछेगी कि वह हिन्दू है या मुसलमान तो वह जवाब नहीं दे पायेंगे. नसीरुद्दीन शाह हो ये डर  उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में हुई उस घटना को लेकर लग रहा है जो गोकशी के बाद हुई थी तथा जिसमें इंस्पेक्टर सुबोध की जान चली गई थी.

यहां सवाल खड़ा होता है कि नसीरुद्दीन शाह को उस समय डर क्यों नहीं लगा था जब आज से लगभग तीन साल पहले उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में तैनात सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह के साथ नबी अहमद तथा उसके गुर्गों ने मॉब लिंचिंग की थी. नबी अहमद को कुख्यात अपराधी अतीक अहमद का दाहिना हाथ माना जाता था तथा नबी अहमद और उसके साथियों ने भरी कचहरी में सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह पर हमला किया था, गोलीबारी हुई थी. शैलेन्द्र सिंह हुए इस हमले के दौरान खुद नबी अहमद को गोली लगी थी लेकिन इसकी सजा मिली एसआई शैलेन्द्र सिंह को जो पिछले तीन साल से जेल की सलाखों के पीछे हैं.

शैलेन्द्र सिंह की गलती सिर्फ यही थी कि उन्होंने माफिया नबी अहमद के आगे झुकने से इनकार कर दिया था क्योंकि जब उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस को जॉइन किया था तब उन्होंने शपथ ली थी कि वह पूरी ईमानदारी के साथ अपना कर्तव्य निभायेंगे. इमानदारी के साथ पुलिस की ड्यूटी करने की सजा मिली शैलेन्द्र सिंह को जो आज जीवित तो है लेकिन जीते जी उनकी जिन्दगी मृत समान हो चुकी है. आज शैलेन्द्र सिंह का परिवार भुखमरी के कगार पर है, उनके बच्चों की स्कूल की फीस भरने के लिए पैसे नहीं है. इसका कारण सिर्फ इतना है कि सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह ने अपनी टोपी कुख्यात नबी अहमद के चरणों में नहीं रखी. नसीरुद्दीन शाह का डर इस घटना पर क्यों नहीं सामने आया? आखिर क्यों नसीरुद्दीन शाह सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह के लिए न्याय नहीं मांगते?

पूरा देश इस बात को स्वीकार करता है कि इंस्पेक्टर सुबोध के साथ जो हुआ वो गलत था लेकिन दरोगा शैलेन्द्र सिंह के साथ नबी अहमद तथा उसके गुंडों ने जो किया वो क्या था? नसीरुद्दीन शाह हो या पूरी की पूरी अवार्ड वापसी गैंग, इनके इरादे नापाक उस समय लगते हैं जब ये एक जैसे दो मामलों में सेलेक्टिव हो जाते हैं. ये इंस्पेक्टर सुबोध के लिए तो न्याय मांगते हैं लेकिन सब इंस्पेक्टर शिलेन्द्र सिंह के लिए नहीं. ये तो उस डीसीपी अयूब पंडित के लिए भी न्याय नहीं मांग पाते जिसे मस्जिद के सामने मजहबी कट्टरपंथियों ने पीट पीट कर मार डाला था. हमें उम्मीद है कि देश नसीरुद्दीन शाह तथा उनके आकाओं के नापाक इरादों को नाकामयाब करेगा तथा न सिर्फ इंस्पेक्टर सुबोध बल्कि सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र को भी न्याय मिलेगा.

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