प्रिया प्रकाश को इस्लाम विरोध बताते हुए तमाम मज़हबी लोग गए थे पुलिस स्टेशन और मांगी थी सज़ा, अब आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला

बहुत ही कम समय में अपनी आँखों की हरकतों से बहुत प्रसिद्ध हो गयी प्रसिद्ध मलयालम अभिनेत्री प्रिया प्रकाश को अचानक ही तमाम मजहबी लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ा था जिसके चलते कुछ समय के लिए उन्हें मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी थी . मुस्लिम समाज का एक बड़ा वर्ग उनके खिलाफ अदालत से ले कर पुलिस थानों तक चक्कर लगाने लगा था और किसी भी हाल में प्रिय प्रकाश को इस्लाम विरोधी घोषित करते हुए उन्हें सज़ा देने की मांग कर रहा था .

ज्ञात हो की सुप्रीम कोर्ट का फैसला नवोदित अभिनेत्री प्रिया प्रकाश के लिए किसी वरदान से कम नहीं है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केरल की एक्ट्रेस प्रिया प्रकाश वारियर के खिलाफ तेलंगाना और महाराष्ट्र में दर्ज एफआईआर को निरस्त कर दिया गया है। मुस्लिम संगठनों के भारी दबाव में अदालत पहुची प्रिया प्रकाश को फौरी राहत तब ही मिल गयी थी जब पिछले 21 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर पर रोक लगा दी थी। इसके बाद इस प्रसिद्ध अभिनेत्री प्रिया प्रकाश ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अपने खिलाफ दर्ज मामलों को निरस्त करने की मांग की थी जिस पर उनके पक्ष में फैसला आया ।

इस मामले में मुख्य न्यायाधीश चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने अपने एक आदेश में कहा कि ओरु ओदार लव के गाने से मुस्लिम समुदाय की भावनाएं आहत नहीं होती हैं। सबसे राहत की बात ये है कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश देते हुए कहा कि इस गाने को लेकर भविष्य में भी प्रिया प्रकाश के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी।

अपनी याचिका में प्रिया प्रकाश ने कहा था कि ओरु ओदार लव के गाने के गलत अनुवाद को आधार बनाकर कुछ लोगों ने केस दर्ज करवाए हैं। अपनी याचिका में उन्होंने आशंका जताई थी कि गैर मलयाली भाषी दूसरे राज्यों में भी ऐसे केस दर्ज किए जा सकते हैं।

प्रिया प्रकाश वारियर के खिलाफ तेलंगाना और महाराष्ट्र में एफआईआर दर्ज की गई थी। एफआईआई में फिल्म निर्माताओं पर एक धार्मिक समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया गया था।

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