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पूरे राष्ट्र में धन्यवाद हो रहा उस प्रदेश सरकार का जो कक्षा 2 से छात्रों को पढ़ाएगी संस्कृत


पूरा देश उस प्रदेश सरकार को धन्यवाद कर रहा है जिसने दूसरी कक्षा से छात्रों को देवभाषा संस्कृत को पढाना अनिवार्य कर दिया है. ये खबर देवभूमि हिमाचल से है जहाँ अब दूसरी क्लास से संस्कृत पढ़ाई जाएगी. यह जानकारी शिक्षामंत्री सुरेश भारद्वाज ने दी है. फिलहाल, छठी कक्षा से सूबे के स्कूलों में संस्कृत पढ़ाई जाती है. इस बात का एलान स्वयं राज्य के शिक्षामंत्री सुरेश भारद्वाज ने किया. हिमाचल सरकार के इस फैसले ही देशभर में तारीफ़ की जा रही है.

धर्मशाला में मंगलवार को शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की बैठक में शैक्षणिक विषयों पर विशेष रूप से विचार किया गया. प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण व संस्कारयुक्त शिक्षा मिले, इसके लिए सिलेबस में परिवर्तन किया जाए. शिक्षा मंत्री ने बताया कि संस्कृत को दूसरी कक्षा से शुरू करने के लिए सिलेबस को स्वीकृति प्रदान की गई. शतरंग और योग का सिलेबस, जिसे एससीईआरटी सोलन ने बनाया है, को भी अप्रूव किया गया है.

शिक्षा मंत्री ने कहा कि आजकल बहुत से स्कूल डम्मी एडमिशन करते हैं और बच्चे बाहर जाते हैं. ऐसे कार्यों को रोकने के लिए शिक्षा बोर्ड सर्विलांस कमेटी बनेगी और कोई विद्यालय ऐसी गतिविधियों में संलिप्त पाया तो उसकी संबद्धता रद्द कर दी जाएगी. इसके अतिरिक्त जहां पहले 40 बच्चों पर एक इनविजिलेटर लगाया था, अब 25 बच्चों पर एक इनविजिलेटर रखा जाएगा. ऐसा इसलिए किया गया है कि क्योंकि कई स्कूलों में कमरे छोटे होते हैं, जिनमें 40 बच्चे नहीं बैठ पाते हैं.

हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार में शिक्षा मंत्री सुरेश भरद्वाज ने कहा कि प्रिंटिंग के टेंडर में इस मर्तबा अच्छा कागज लेकर पिछले वर्षों की अपेक्षा 3 करोड़ रुपये की बचत की गई है, जो कागज पहले 77 हजार रुपये प्रति मीट्रिक टन लिया जाता था, उसे इस वर्ष 69 हजार प्रति मीट्रिक टन लिया गया है. इसके अतिरिक्त अन्य परीक्षा संबंधी विषयों पर विचार किया गया. शिक्षा मंत्री ने बताया कि स्कूलों में शिक्षा का स्तर अच्छा हो, इसके लिए भी शैक्षणिक कमेटी की बैठक में जो निर्णय लिए गए, उन्हें अप्रूण किया गया है.

शिक्षामंत्री ने कहा कि इसके अतिरिक्त प्रार्थना सभा में बदलाव करने सहित बैग-फ्री डे पर विद्यार्थियों को क्या-क्या किया जाए, इस बारे में विद्यार्थियों को बताने का निर्णय लिया गया. 500 प्राइमरी स्कूलों में कमरों की कमी के सवाल पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि इतनी कमी तो नहीं है, लेकिन जो थोड़ी बहुत कमी है, उस पर कार्य किया जा रहा है. जहां एक कमरा है, वहां दूसरा कमरा एड करने के लिए सरकार प्रयासरत है.


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