घूँघट रहा है हिंदू महिलाओं की लाज का प्रतीक लेकिन एक सरकार में उस पर ही हल्ला बोल.. खुद मुख्यमंत्री हैं आगे.. जबकि नहीं बोल सके बुर्का पर


घूँघट हिन्दू समाज की वो प्रथा रही है जिसे लाज का प्रतीक माना जाता है. हिन्दू धर्म में महिलाओं पर घूँघट के लिए दवाब नहीं डाला जाता बल्कि महिलायें स्वयं उस व्यक्ति से सम्मानस्वरुप पर्दा करती हैं जो रिश्ते में उनसे बड़ा होता है. लेकिन देश के एक राज्य की सरकार के मुखिया ने हिन्दू धर्म में लाज के प्रतीक घूंघट पर ही हल्ला बोल दिया है तथा इसे महिलाओं की प्रगति में बाधक बताया है. लेकिन ये मुख्यमंत्री साहब बुर्का के खिलाफ एक शब्द नहीं बोल सके हैं.

खबर के मुताबिक़, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने घूंघट प्रथा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. जयपुर में मंगलवार को एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री  भी घूंघट है, एक महिला को घूंघट में कैद करने का, एक समाज को क्या अधिकार है? जब तक घूंघट रहेगा तब तक महिलाएं आगे नहीं बढ़ पाएंगी, जमाना गया घूंघट का.” संबोधन के दौरान सीएम ने घूंघट प्रथा पर हमला बोलते हुए कहा कि वक्त बदल चुका है. अब महिलाएं पढ़-लिखकर हर क्षेत्र में सफलता हासिल कर रही हैं, इसलिए घूँघट ख़त्म होना चाहिए.

कांग्रेस पार्टी के नेता तथा राजस्थान के मुख्यमंत्री घूँघट के खिलाफ तो अभियान चला रहे हैं लेकिन वह बुर्का के खिलाफ एक शब्द तक नहीं बोल पा रहे हैं जिसमें महिलाओं को सर से पैरों तक ढकने के लिए मजबूर किया जाता है. जहाँ घूँघट करना स्वेच्छिक हैं वहीं बुर्का अपने मजहब में अनिवार्य है लेकिन गहलोत साहब को घूँघट तो महिलाओं की प्रगति में बाधक लगता है लेकिन बुर्का नहीं. या ये भी हो सकता है कि वह बुर्का को महिला प्रगति में लाभदायक मानते हों ?


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