जनसंख्या नियंत्रण क़ानून की राह में गढ़े मील के पत्थर को उखाड़ सकती है एक सरकार.. क्या बेतहाशा बढ़ती आबादी को सही मानते हैं ये मुख्यमंत्री ?


लगभग पूरा देश इस समय देश की सरकार से जनसंख्या नियंत्रण क़ानून की मांग कर रहा है ताकि देश की बेतहाशा बढ़ती आबादी पर रोक लगाई जा सके. सुदर्शन टीवी के प्रधान संपादक श्री सुरेश चव्हाणके जी इसके लिए लंबे समय से मुहिम चला रहे हैं. कई राज्यों ने इसे लेकर आंशिक प्रावधान भी शुरू किये हुए हैं. लेकिन अब एक राज्य के मुख्यमंत्री जनसंख्या नियंत्रण क़ानून की राह में मील का पत्थर साबित होने वाले एक कानून को बदलने की तैयारी कर रही है.

हम बात कर रहे हैं राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार की जो पिछली बीजेपी सरकार  एक और अहम निर्णय को बदलने की तैयारी में है. राज्य सरकार पंचायत चुनाव में दो से अधिक संतान होने पर चुनाव नहीं लड़ सकने की बाध्यता को हटा सकती है. इसके लिए सरकार अयोग्यता संबंधी नियम में बदलाव करने की तैयारी कर रही है. सूत्रों के अनुसार सरकार में इसके लिए उच्च स्तर पर मंथन चल रहा है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राज्य सरकार की पहली वर्षगांठ पर इसकी घोषणा कर सकते हैं.

बता दें कि पिछली वसुंधरा राजे सरकार ने एक कानून लाकर दो से अधिक संतान होने पर स्थानीय निकाय एवं पंचायतीराज संस्थाओं में चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी. इस फैसले को जनसंख्या नियंत्रण क़ानून की राह में मील का पत्थर माना गया था. वसुंधरा सरकार ने राजस्थान पंचायतीराज अधिनियम-1994 की धारा-19 में संशोधन कर दो से अधिक संतान होने पर पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्यता संबंधी प्रावधान किया था.

इसके तहत 1995 से पहले जिनके दो या दो अधिक बच्चे हैं, उन्हें 1995 के पश्चात एक और बच्चा होने की स्थिति में चुनाव लड़ने अयोग्य घोषित किया जाता है. लेकिन अशोक गहलोत सरकार इस क़ानून को बदलने की तैयारी में है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़, आशिक गहलोत सरकार पंचायत चुनाव में दो से अधिक संतान होने पर चुनाव नहीं लड़ सकने की बाध्यता को हटाएगी. उल्लेखनीय है कि राज्य में जनवरी-फरवरी में पंचायत चुनाव प्रस्तावित हैं.


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