हिंदू-मुस्लिम भाई-2 का नारा लगाकर कभी उत्तर प्रदेश में सीटें निकालने वाली पार्टी ने श्रीराम मंदिर पर आए आदेश के खिलाफ डाली पुनर्विचार याचिका


ये वो पार्टी है जिसने अपने अस्तित्व में आने के समय हिन्दू मुस्लिम भाई भाई का नारा दिया था. कथित धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के पालन का दावा करने वाली ये पार्टी देश की न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास की बता करती थी. लेकिन इस पार्टी के वादों तथा दावों का सच सब सामने आ रहा है. हम बात कर रहे हैं एक समय उत्तर प्रदेश में तेजी से उभरने वाली पीस पार्टी की. बता दें कि पीस पार्टी ने अयोध्या श्रीराम मंदिर पर सुप्रीम फैसले के विरोध में पुनर्विचार याचिका दायर की है.

पीस पार्टी ने आज 6 दिसबंर को अयोध्या फैसले पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की. इसमें पीस पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ के 9 नवंबर के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है. पीस पार्टी ने अपनी याचिका में कहा है कि 1949 तक विवादित स्थल पर मुस्लिमों का अधिकार था. 1949 तक सेंटल डोम के नीचे नमाज़ अदा की गई थी और कोई भी भगवान की मूर्ति डोम के नीचे तब तक नहीं थी. याचिका में पीस पार्टी की तरफ से ये भी कहा गया है कि पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट में भी इस बात के साक्ष्य नहीं है कि मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई गई.

पीस पार्टी की पुनर्विचार याचिका में कहा गया है कि 1885 में बाहरी अहाते में राम चबूतरे पर हिन्दू पूजा करते थे आंतरिक हिस्सा मुसलमानों के पास था. इस बीच मामले में हिंदू महासभा ने भी ऐलान किया है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगा. हिंदू महासभा मुस्लिम पक्षकारों को 5 एकड़ जमीन दिए जाने के खिलाफ याचिका दाखिल करेगी. हिंदू पक्षकारों पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को लेकर विचार करने को कहेगी.

पीस पार्टी की याचिका के साथ ही मुस्लिम पक्ष की ओर से चार पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल हुईं.  मुस्लिम पक्ष की तरफ से जिन चार लोगों की याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुईं, उनमें मिसबाहुद्दीन, मौलाना हसबुल्लाह, हाजी महबूब और रिजवान अहमद शामिल हैं. इन सभी ने अपनी याचिकाएं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के समर्थन से दाखिल की हैं.


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