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“जय श्रीराम” के बाद अब “हर हर महादेव”.. अदालत में शुरू हुई काशी में महादेव के उस पवित्र मन्दिर पर सुनवाई जहाँ अब बनी है मस्जिद


अयोध्या आन्दोलन के समय एक नारा लगा करता था – “अभी तो पहली झांकी है, मथुरा काशी बाकी है’ … उसको चरितार्थ करने की दिशा में तमाम प्रयास किये गये. अयोध्या आन्दोलन में तो कई हिन्दुओं ने बलिदान भी दिए. इसमें कुछ को मुलायम सिंह जैसे मुख्यमन्त्रियो ने सार्वजनिक रूप से जिम्मेदारी लेते हुए पुलिस की गोलियों से मरवाया था तो कुछ को गोधरा में उन्मादियो की भीड़ ने जला दिया था.

लेकिन इसके बाद भी श्रीराम व् महादेव भक्तो के हौसले पस्त नहीं हुए थे. उन्होंने अपनी लड़ाई को धार्मिक रूप से जारी रखा और आख़िरकार उनकी जीत संवैधानिक रूप से भी हुई. अब बारी काशी के उस मन्दिर की बताई जा रही है जिसको कहा जाता है कि औरंगजेब के जमाने में गिरा कर वहां मस्जिद बनवा दी गई. यहाँ बाकायदा नमाज़ पढ़ी जाने लगी जो अब तक यथावत जारी है. अब उसी मामले की सुनवाई अदालत में शुरू हुई है.

गौर करने योग्य है कि 17 फरवरी से ज्ञानवापी मस्जिद के मुद्दे पर बनारस के सिविल कोर्ट में सुनवाई शुरू हो रही है। इसी सुनवाई के बहाने विहिप ने अपने अभियान को तेज करने की रणनीति बनाई है। विहिप के एजेंडे में अब काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद मामला आ गया है। विहिप के सूत्रों ने साफ-साफ कहा कि अयोध्या में राम मंदिर, बनारस का ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि तीनों हमेशा से विहिप के मुख्य मुद्दे रहे हैं। विहिप के अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे  बोल गए कि काशी विश्वनाथ मंदिर हिंदू समाज के धार्मिक और स्वाभिमान का प्रतीक है, जिसको छोड़ा नहीं जा सकता और जो भी उचित होगा, वह किया जाएगा।


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