6 जनवरी- आज ही तड़प कर मरा था क्रूर, लुटेरा, विश्वासघाती, हत्यारा, समलिंगी और रानी पद्मिनी के जौहर का जिम्मेदार अलाउद्दीन खिलजी


ये वो दिन है जिसको इंसाफ का भी दिन कहा जाता है. इस दिन हिन्दू नारियो पर कुदृष्टि रखने वाला दरिंदा और नर पिशाच कहा जा सकने वाला खिलजी तडप कर मरा था. इस दिन को इतिहास में भले ही कुछ वामपंथियो ने प्रमुखता न दी हो लेकिन आज पृथ्वी उस दानव से खाली हुई थी जिसने राजस्थान की वीरांगनाओं को जौहर कर लेने पर मजबूर कर दिया था. उस खिलजी की कब्र आज भी दिल्ली में एक सरकारी संरक्षित इमारत में पड़ी है जबकि कई वीर क्रांतिकारियों के बलिदान को सम्मान का इंतजार है.

अलाउद्दीन खिलजी के बारे में कहते हैं कि वह एक गे था और उसके नौकर मलिक कफूर के साथ उसके अन्तरंग संबंध थे. बताया गया है कि अलाउद्दीन खिलजी पुरुषों और खासकर बिना दाढ़ी वाले पुरुषों के लिए आकर्षित था. कई किताबों में इस बात का दावा किया गया है कि उसके हरम में करीब 50,000 पुरुष थे जो उसके साथी थे तथा वह अपनी पसंद के अनुसार उनके साथ शारीरिक संबंध बनाता था. खिलजी के इस लव इंट्रेस्‍ट का कहानी मलिक कफूर नामक व्‍यक्ति के बारे में सर्च करने पर भी पता चलती है.

खिलजी ने गुजरात में जीत हासिल करने के बाद काफूर को एक हजार दिनार देकर खरीदा था.  कफूर का नाम कहीं-कहीं पर ‘कफूर हजार दिनारी’ भी मिलता है. खिलजी और कफूर के संबंधों के बारे में तारीख-ए-फिरोजशाही समेत कई किताबों में लिखा गया है.  कहते हैं कि खिलजी के हरम में जो 50,000 पुरुष थे वे सभी बिना दाढ़ी वाले थे. इतिहास में दावा है कि खिलजी, कफूर की खूबसूरती के आगे खुद को बेबस महसूस करता था और कफूर को पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार था.

इसके बाद खिलजी ने 1 हजार दिनार देकर कफूर को खरीदा था. कफूर और खिलजी की करीबियां इतनी थी कि कफूर को खिलजी ने मिलिट्री कमांडर यानी मालिक नायब बना दिया था. कहा तो ये भी जाता है कि कफूर ने ही खिलजी की मौत की साजिश भी रची थी. कहते हैं कि जो दिल के सबसे करीब होता है वही सीने में खंजर भोंकता है। अलाउद्दीन खिलजी के साथ भी ऐसा ही हुआ था। खिलजी की बच्चाबाजी का शौक ही उसके अंत का कारण बना था। मलिक काफूर जिनके साथ अलाउद्दीन के नाजायज संबंध थे उसी ने ही खिलजी को जहर देकर मार दिया .

जब खिलजी कमजोर पड़ने लगा तो उसके कमांडर मलिक काफूर ने ही उसकी सत्ता हथियाने के लालच में उसे मार डाला। उसने खिलजी को नजरबंद कर धीमा जहर देना शुरू कर दिया। उस जहर से उसकी मौत हो गई और उसकी हत्या के बाद उसने उसके बेटों को भी अंधा कर दिया। काफूर ने उसकी सभी बेगमों को अपना गुलाम बना लिया था।लेकिन मलिक काफुर का ये पागलपन ज्यादा दिन नहीं चल पाया और खिलजी के बेटे मुबारक ने कुछ सैनिकों के साथ मिल कर उसकी गर्दन काट दी।

 


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