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नौकरी के ख्वाब लेकर अमेरिका गये थे 145 भारतीय.. हाथ-पैर बांधकर भेजे गये वापस


वो 145 पढ़े-लिखे शिक्षित युवा भारतीय अमेरिका में नौकरी का ख्वाब लेकर वहां गये थे लेकिन वो नहीं जानते थे कि उन पर कितनी बड़ी आफत आने वाली है. देश के युवाओं का बड़ा वर्ग सोचता है कि वह USA जाए तथा वहां नौकरी करे, इसी लक्ष्य को पाने के लिए कई बार लोग एजेंटों के झांसे में आ जाते हैं. इन 145 भारतीयों के साथ भी यही हुआ जब ये नौकरी का सपना पाले अमेरिका गये. फिर इसके बाद जो हुआ उसकी इन सभी ने कल्पना तक नहीं की थी.

हाथ पैर बांधकर भेजे गये वापस

कल ये सभी भारतीय भारत वापस लौटकर आये लेकिन उस तरह नहीं जिस तरह से ये अमेरिका गये थे. 145 भारतीयों को अमेरिका से भारत वापस हाथ पैर बांधकर भेजा गया था. इन युवाओं के हाथ और पैर बांधे जाने से फूल चुके थे और उनके चेहरे पर डर और मायूसी साफ देखी जा सकती थी. दरअसलइन सभी 145 भारतीयों ने अपने सपने को पूरा करने के लिए एजेंटों को 25-25 लाख रुपये दिए थे. इन सभी लोगों को अवैध रूप से अमेरिका में घुसने के आरोप में वहां के इमिग्रेशन अधिकारियों ने पकड़ लिया था और डिटेंशन सेंटर में में कैद कर लिया था.

दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनैशनल एयरपोर्ट पर बुधवार सुबह एक के बाद एक ये 145 भारतीय भीड़ के बीच फटे कपड़ों और बिना लैस के जूतों में बाहर आ रहे थे. इनमें 3 महिलाएं भी थीं. उन्हें अमेरिका के ऐरिजोना से डिपोर्ट किया गया था. उनके साथ 25 बांग्लादेशियों को भी डिपोर्ट किया गया था, इसलिए उन्हें लेकर आ रहा चार्टर्ड प्लेन ढाका में भी कुछ देर रुका था. करीब 24 घंटे लंबे सफर की वजह से उनके चेहरों पर थकान साफ दिख रही थी. इसके अलावा अमेरिका में डिटेंशन कैंपों में खाने-पीने, उठने-जागने को लेकर यातना जैसी पाबंदियों की वजह से वे बुरी तरह टूट चुके थे.

इनमें से कुछ लोग क्वॉलिफाइड इंजिनियर थे, लेकिन उनके पास नौकरी नहीं थी. उन्होंने अमेरिका पहुंचने के लिए एजेंटों को 25-25 लाख रुपये की बड़ी रकम अदा की थी. उन्हें उम्मीद थी कि वहां उन्हें अच्छी नौकरी मिलेगी. लेकिन उन्हें मिली जिल्लत. पिछले 5 महीनों से वे डिटेंशन सेंटरों में कैद थे. रमनदीप सिंह गाडा राहत की सांस लेते हुए कहते हैं, ‘लंबे समय बाद किसी ने मुझे मेरे नाम से पुकारा है. इमिग्रेशन कैंपों में हमें हमारे नामों से नहीं, बल्कि नंबरों से बुलाया जाता था तो हमें दिया गया था.’ गाडा बताते हैं कि वहां उनके साथ अपराधियों जैसा सलूक होता था. वहां कई दिनों तक उन्हें भूखे भी रहना पड़ा क्योंकि भोजन में उन्हें कभी-कभी बीफ दिया जाता था जिसे वे धार्मिक वजहों से नहीं खा सकते थे.


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