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धारा 370 हटाने के बाद मोदी सरकार ने उठाया एक और बड़ा कदम.. वो कदम जिससे बदल जायेगी भारत की तस्वीर


जिस तरह से संसद के पिछले सत्र में मोदी सरकार ने  जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने का क्रांतिकारी फैसला लिया था, मोदी सरकार कुछ वैसा ही एक और बड़ा व क्रांतिकारी फैसला लेने की तैयारी में है. इस वक्त जारी संसद के शीतकालीन सत्र में मोदी सरकार एक ऐसा बिल लाने जा रही है जो पास हो गया तो भारत के भविष्य की दिशा तथा दशा ही बदल जायेगी. उम्मीद जताई जा रही है कि जिस तरह से पिछले सत्र में दोनों सदनों से 370 को हटाने वाला बिल पास हुआ था, वैसे ही इस सत्र में भी ये बिल पास हो जाएगा.

जानकारी के मुताबिक़, इस सत्र के दौरान मोदी सरकार सिटिजनशिप अमेंडमेंट बिल लेकर आएगी. इस बिल का सीधा असर देश के सवा सौ करोड़ नागरिकों पर होगा. Citizenship Amendment Bill यानी CAB के तहत मोदी सरकार बाहर से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई, पारसी आदि धर्मों के लोगों को भारतीय नागरिकता देने जा रही है. सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल यानी नागरिकता संशोधन बिल का सबसे पहले सीधा असर असम में दिखाई देगा क्योंकि वहां NRC लागू हो चुकी है.

जानकारी के मुताबिक़, नागरिकता संशोधन विधेयक को मोदी कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है तथा अब ये बिल कभी भी संसद के पटल पर रखा जा सकता है. बिल का विरोध कर रहे विपक्षी दलों ने इसे संविधान की भावना के विपरीत बताते हुए कहा है कि नागरिकों के बीच उनकी आस्था के आधार पर भेद नहीं किया जाना चाहिए. वहीं मोदी सरकार का कहना है कि पड़ोसी देशों से आने वाले 6 धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को शरण देना मोदी सरकार की सर्व धर्म समभाव की नीति का परिचायक है.

बता दें कि नागरिक संशोधन विधेयक के तहत 1955 के सिटिजनशिप ऐक्ट में बदलाव का प्रस्ताव है. इसके तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आकर भारत में बसे हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रस्ताव है। इन समुदायों के उन लोगों को नागरिकता दी जाएगी, जो बीते एक साल से लेकर 6 साल तक में भारत आकर बसे हैं. फिलहाल भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए यह अवधि 11 साल की है.


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