सतर्क थी ATS जिसने दबोच लिए हैं आगरा से 6 बांग्लादेशी.. घातक रूप दिखा रहा तथाकथित सेक्यूलरिज्म

कथित बुद्धिजीवियों तथा राजनेताओं के छद्म सेक्यूलरिज्म के कारण किस तरह भारत में मजहबी संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है, इसका गवाह बना है उत्तर प्रदेश का आगरा. खबर के मुताबिक़, उत्तर प्रदेश के आगरा रेलवे स्टेशन से 6 बांग्लादेशी घुसपैठियों को गिरफ्तार किया गया है. राष्ट्र की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध यूपी एटीएस ने इन 6 बांग्लादेशी घुसपैठियों को गिरफ्तार किया है. एटीएस को इनके पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, फर्जी आधार कार्ड, इलेक्ट्रिक टेस्टर, बांग्लादेश और पाकिस्तान के नंबर लिखी पर्चियां व अन्य दस्तावेज मिले हैं.

एटीएस के मुताबिक इनका मूवमेंट राजस्थान और पंजाब में पाकिस्तान की सीमा तक था। पूछताछ में पता चला कि इन लोगों ने तार-बाड़ पार कर पाकिस्तान जाने की कोशिश की थी, लेकिन सफलता नहीं मिली. आईजी एटीएस असीम अरुण ने बताया कि लगातार सूचनाएं मिल रही थीं कि कुछ बांग्लादेशी अवैध रूप से उत्तर प्रदेश में रह रहे हैं. ये लोग बांग्लादेश से और लोगों को बुलाते थे. उनके भारत आने पर ये उनके फर्जी दस्तावेज (आधार कार्ड, राशन कार्ड) बनवा देते थे, जिसके आधार पर ये अपना फर्जी पासपोर्ट तक बनवा लेते हैं.

सूचनाओं के आधार पर एटीएस की टीम ने रविवार को आगरा रेलवे स्टेशन से छह संदिग्ध लोगों को पकड़ कर उनसे पूछताछ की. पकड़े गए बांग्लादेशी नागरिकों में मदारीपुर बांग्लादेश निवासी हबीबुर रहमान, नारायण गंज बांग्लादेश निवासी जाकिर हुसैन, खानसामा बांग्लादेश निवासी मोहम्मद काबिल, सिलेट बांग्लादेश निवासी कमालुद्दीनस भालूका बांग्लादेश निवासी ताईजुल इस्लाम और गाजीपुर बांग्लादेश निवासी लिटोन विश्वास हैं.

असीम अरुण ने बताया कि पाकिस्तान में उनके सहयोगियों ने उन्हें आगाह किया था कि इलेक्ट्रिक टेस्टर से तार-बाड़ की बिजली चेक करने के बाद ही सीमा पार करें, इसीलिए उन लोगों ने टेस्टर खरीदे थे। असीम अरुण ने बताया कि ये लोग बांग्लादेश से भारत कब आए? यहां फर्जी तरीके से आधार कार्ड और पासपोर्ट कैसे बनता हैं? उन्हें बनवाने वाले कौन हैं? वह पाकिस्तान क्यों जाना चाहते थे? यहां उनके और कौन -कौन सहयोगी हैं? उनका भारत आने का मुख्य उद्देश्य क्या है? इनके जवाब अभी इन लोगों से पूछताछ कर जुटाए जाने हैं.

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