अमेरिका को बुलाया वार्ता के लिए, फिर कर दिया ब्लास्ट और गिरी 40 लाशें..

आतंक किसी का सगा नहीं , ये बात एक बार फिर से साबित हुई है इस्लामिक मुल्क अफगानिस्तान में . कहना गलत नहीं होगा कि दुनिया इस समय आतंक से जूझ रही है और एक तरफ दुनिया की सज्जन शक्तियाँ और दूसरी तरफ आतंकी हैं.. इसी आतंक का शिकार अब हुआ है दुनिया की महाशक्ति अमेरिका जो झूठे वादों में आ गया .

ज्ञात हो कि अमेरिका जहाँ दुनिया के सबसे बड़े तानाशाह किम जोंग से चर्चा के माध्यम से अपने मसले हल कर रहा है तो वहीँ कुछ वैसा ही उसने आतंकी दल तालिबान के साथ भी सोचा था . पर उसकी सोच आख़िरकार गलत साबित हुई और उसको खाना पड़ा एक बड़ा धोखा . एक बड़े आतंकी हमले के बाद उसकी बातचीत के माध्यम से समस्या समाधान की सभी कोशिशे ध्वस्त हो गयी हैं . एक बार फिर से आतंकी हमले से लहुलुहान हुआ है अफगानिस्तान .

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, संघर्ष तड़के उस समय शुरू हुआ , जब 20 से अधिक तालिबान आतंकियों ने शोराब स्थित 215 मैवंद कोर्प्स बेस पर हमला किया। आतंकियों ने इस दौरान सैन्य ठिकाने की इमारत में तीन आत्मघाती बम धमाके किए, जिसमें कम से कम 40 सैनिकों की मौत हो गई।  ध्यान देने योग्य है कि दक्षिण-पश्चिम अफगानिस्तान में शुक्रवार को अमेरिका-अफगानिस्तान के संयुक्त सैन्य अड्डे पर तालिबान की ओर से किये गए एक हमले में अफगान सुरक्षा बलों के कम से कम 23 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अफगानिस्तान में शांति के लिये अमेरिका और तालिबान वार्ताएं कर रहे हैं।

अफगानी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता गफूर अहमद जावेद ने कहा, “अभियान खत्म हो गया है। 23 सुरक्षा कर्मियों की मौत हुई है और 15 घायल हुए हैं। 20 आतंकी भी मारे गए।” प्रांतीय सरकार के एक अन्य सूत्र ने भी मृतकों की संख्या की पुष्टि की है। इस हमले का निशाना अमेरिकी   सुरक्षा  बल बताये जा रहे हैं जिस से पहले अफगानी बलों की टुकड़ी   आ गयी  और वो बड़ी संख्या में मारे गये . अब अमेरिका एक नये  सिरे से विचार कर रहा   इस   वार्ता को आगे बढाने के लिए .

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