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कमलेश तिवारी की क्रूरतम ह्त्या के गुनहगार को मिली जमानत.. आक्रोशित हुआ हिन्दू समाज


वो 18 अक्टूबर का दिन था जब हिन्दू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी की उन्हीं के घर में घुसकर क्रूरतम तरीके से इस्लामिक आतंकी दल तालिबान तथा ISIS के अंदाज में हत्या कर दी गई थी. कमलेश तिवारी की ह्त्या के बाद पूरा देश आक्रोश से भर उठा था लेकिन कुछ मजहबी उन्मादी लोग ऐसे भी थी जिन्होंने कमलेश तिवारी के हत्यारों का न सिर्फ समर्थन किया था बल्कि कमलेश तिवारी की ह्त्या के बाद उनकी मदद भी की थी.

ऐसा ही एक बरेली का मौलाना था कैफी अली रिजवी जिसने कमलेश तिवारी के हत्यारों की मदद की थी तथा उनको संरक्षण भी दिया था. इसके  बाद मौलाना कैफ़ी अली को गिरफ्तार भी किया गया था. लेकिन अब कोर्ट ने मौलाना कैफ़ी  को जमानत दे दी है. मौलाना कैफ़ी अली रिजवी की जमानत अर्जी मंजूर करते हुए प्रभारी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुदेश कुमार ने 20-20 हजार रुपये की दो जमानतें एवं निजी मुचलका दाखिल करने पर रिहा करने का आदेश दिया है.

कमलेश तिवारी के हत्यारों की मदद करने वाले मौलाना को जमानत मिलने के बाद देश के हिन्दू संगठन आक्रोशित हो उठे हैं. हिन्दू संगठनों का कहना है कि जिस व्यक्ति ने मजहब के नाम पर कमलेश तिवारी की ह्त्या करने वालों की मदद की, उन्हें संरक्षण दिया, उसको जमानत देना बिल्कुल गलत है क्योंकि ये व्यक्ति समाज के लिए घातक साबित हो सकता है. हिन्दू संगठनों ने राज्य सरकार से निवेदन किया है कि वह मौलाना कैफ़ी अली की जमानत के खिलाफ कोर्ट में अपील करें तथा उसको जेल से बाहर आने से रोकें.

अदालत के समक्ष अभियुक्त मौलाना कैफी अली रिजवी की ओर से तर्क प्रस्तुत कर कहा गया कि उसे जिस अपराध में गिरफ्तार किया गया है, वह सभी जमानती हैं. लिहाजा जमानत पर उसे रिहा किया जाए. पुलिस को विवेचना में पता चला था कि गुजरात के रहने वाले अशफाक एवं मोइनद्दीन कमलेश तिवारी की हत्या के मौलाना कैफी अली रिजवी के घर रुके थे. जहां पर मौलाना ने उनकी मदद करने के साथ-साथ इलाज भी कराया था. मामले की जांच कर रही एसआइटी ने साक्ष्य के आधार पर मौलाना को 22 अक्टूबर को बरेली से गिरफ्तार किया था. इस मामले में साजिशकर्ता सहित आधा दर्जन आरोपित जेल में हैं.


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