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चाहे जो कीमत चुकानी पड़े लेकिन हर वो काम करेंगे जिसका वादा करके बीजेपी को सत्ता मिली है- राजनाथ सिंह


नागरिकता संशोधन अधिनियम CAA के विरोधियों द्वारा मचाये जा रहे हंगामे के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बड़ा बयान दिया है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा हमने अपने घोषणा पत्र में जो बातें कही है उसे अक्षरत: पालन कर रहे हैं और उसे पूरा करने की तरफ तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. मैं देश के लोगों को यकीन दिलाना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री और हमारी पार्टी जो कहेगी उसके लिए हमें चाहे जितनी कीमत चुकानी पड़ेगी हम कीमत चुकाएंगे लेकिन हम उसे पूरा करके ही दम लेंगे.

राजनाथ सिंह ने कहा- सीएए हमारा वादा था, हमने अपना वादा पूरा किया है. हमने कोई अपराध नहीं किया. लेकिन इसे हिन्दू और मुसलमान के नजरिये से देखा जा रहा है. संदेह चाहे कोई भी कर ले, हमारे प्रधानमंत्री धर्म के आधार पर नहीं, इंसानियत के आधार पर सोचते हैं. हम हिंदुस्तान की जनता को धोखा देकर राजनीति नहीं करना चाहते हैं. हम आपके अंदर दहशत पैदा करके भी राजनीति नहीं करना चाहते हैं. हम राजनीति करना चाहते हैं तो आपके दिलों को जीतकर राजनीति करना चाहते हैं.

मेरठ में एक सभी को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि 2019 का घोषणा पत्र तैयार करने की जिम्मेदारी मुझे मिली थी. मेरठ की धरती से पूरे देश को यकीन दिलाना चाहता हूं कि, जो वादा किया है, चाहे जितनी भी कीमत चुकानी पड़े, हम पूरा करेंगे. हमने 370 हटाने का वादा किया था. सरकार बनी तो चुटकी बजाते ही समाप्त कर दिया. वादा किया था नागरिकता का कानून लाएंगे. पिछली सरकार में राज्यसभा में बहुमत न होने के कारण पारित नहीं हो सका था. इसलिए इस बार इसे पेश किया.

उन्होंने कहा कि कुछ ताकतें हिंदू मुसलमान को बांटकर सत्ता का स्वाद चखती हैं. हमने उसकी कभी परवाह नहीं की. महात्मा गांधी ने कहा था- अगर अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न होता है तो उसके प्रति भारत को संवेदनशील होना होगा. महात्मा गांधी ने जो कहा था, उसे भाजपा ने कर दिखाया है. कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 18 दिसंबर 2003 को कहा था- पाकिस्तान, बांग्लादेश में जिन हिंदू-सिखों का उत्पीड़न हुआ है. सरकार को उन्हें नागरिकता देनी चाहिए और हमने यही किया है.

राजनाथ सिंह ने कहा कि विपक्षी दल दुष्प्रचार कर रहे हैं कि, एनआरसी लाकर देश के मुसलमानों को बाहर कर दिया जाएगा. जबकि एनआरसी पर कहीं चर्चा भी नहीं हुई. एनपीआर में यादि आपसे कोई नाम, जन्म तिथि पूछता है तो जो आप देंगे वही लिख लिया जाएगा. कोई किसी पर दबाव नहीं डाला जाएगा. एनआरसी हम लोग भारत में लेकर नहीं आए हैं. ये एनआरसी की चर्चा आजादी के समय आ गई थी। एनआरसी पर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री से उस समय बात की थी. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर असम में एनआरसी लागू हुई. जो ताकतें भ्रम फैला रही हैं, उन पर ध्यान न दें.


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