भाजपा ने संसद में दिखाया- “उसे भारत ही नही, पाकिस्तान अफगानिस्तान और बंगलादेश के भी हिंदुओं की चिंता”


जिस तरह से संसद में कल भारी शोर शराबे के साथ नागरिकता संशोधन बिल को भारतीय जनता पार्टी ने दृढ प्रतिज्ञ हो कर पास करवा लिया उसके बाद पूरे देश में एक बहस जैसी छिड़ गई है कि आखिर ये बिल क्या है और इस से किसी का कोई नुकसान तो नहीं.. इस बिल के विरोध में कांग्रेस ने जिस प्रकार से अपना विरोधी रूप सामने रखा वो निश्चित तौर पर आने वाले चुनावों में एक बड़ा कारक बनेगा कुछ वोटों के ध्रुवीकरण का, कांग्रेस के उसी पक्ष में असदुद्दीन ओवैसी जैसे संसद भी खड़े थे.

एक तरफ से मोर्चा अकेले अमित शाह ने सम्भाल रखा था जिनके पीछे गिरिराज सिंह जैसे सांसद व् अश्वनी चौबे भी पूरे जोश में इस बिल के समर्थन में विपक्ष के आगे अड़े थे. शशि थरूर ने तो इस बिल को जिन्ना से जोड़ दिया था और पारित होने से पहले इसको साम्प्रदायिक आधार पर विवादित बनाने के हर सम्भव प्रयास किये थे. ये वो बिल है जिसमे दुनिया भर के किसी भी कोने में सताए या प्रताड़ित किये जाने वाले हिन्दू को अब भारत में आराम से नागरिकता मिल जायेगी..

दुनिया भर में सर्वविदित है कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान या किसी अन्य इस्लामिक मुल्क में हिन्दू समाज दोहरे दर्जे का नागरिक माना जाता है. या तो उसका जबरन धर्मांतरण करवा दिया जाता है या तो उसकी बहन बेटियों के अपहरण से ले कर उसकी हत्या तक वो तमाम कुकृत्य किये जाते हैं जो उसको आत्महत्या तक करने के लिए मजबूर कर देते हैं. दिल्ली की कालोनियों में बसे पाकिस्तान से आये हिन्दू इस व्यथा और दर्द को आज भी जीवंत रूप में बताते हैं.

इस बिल में न सिर्फ हिन्दू बल्कि सिख , जैन और बौद्ध आदि कोई भी भारत की नागरिकता हासिल कर सकता है अगर उसको दुनिया भर में कहीं भी प्रताड़ित किया जाता है तो.. अब तक इस बिल के न होने के चलते कई बार पाकिस्तान से आये हिन्दुओ को वापस लौटना पड़ा था और वहां उनके साथ घोर प्रताड़ना की गई थी.. लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने इस बिल के साथ दृढ़ता से खड़े हो कर ये जाता दिया है की उसको न सिर्फ भारत बल्कि पाकिस्तान, बंगलादेश और अफगानिस्तान तक के हिन्दुओ की चिंता है..

इस मामले में कांग्रेस के विरोध से उपजे निष्कर्ष से ये साबित होता था कि वो भारत में घुसे रोहिंग्या या बंगलादेशियो को भी भारत का स्थाई नागरिक बनाने के पक्ष में थी जो कि अब सम्भव नहीं है. कांग्रेस की तरफ से शुरुआती विरोध किया गया लेकिन जब भाजपा के साथ उनके सहयोगी दलों ने एकजुटता दिखाई तो उनके प्रयास पस्त हो गए.. इस मामले में शुरुआत में विरोध दिखाने के बाद शिवसेना का भी सकारात्मक रूप रहा जो हिन्दू समाज के लिए सुखद एहसास के रूप में देखा जा रहा है.


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