जानिए क्या हुआ रोहिंग्याओ की उन बस्तियों का जिन्हें तबाह कर दिया था म्यांमार की फौजों ने


जिस प्रकार से रोहिंग्या आतंकियों ने म्यांमार में शांतिप्रिय बौद्धों को पहले उकसाया और बाद में उनसे आमने सामने की लड़ाई लड़ी, वहां से बौद्धों ने भी अपने तेवर बदल डाले और पलटवार किया. उस पलटवार के बाद रोहिग्या आतंकियों के पाँव उखड़ गये और उन्होंने वहां से भागने में ही भलाई समझी. उसके बाद उन्होंने एक सोचा समझा अभियान चलाया जिसमे बौद्धों को अन्तराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने की साजिश रची गई. पर आखिरकार सच सामने आया और वो साजिश असफल रही.

इसके बाद दुनिया भर के तमाम मुस्लिम देशों ने अपने असली रूप में आते हुए फतवा आदि जारी करते हुए म्यांमार के खिलाफ जिहाद आदि का एलान किया, पर म्यांमार की फौजों ने उस पर भी ध्यान नही दिया और अपनी सीमाओं की रखवाली के लिए ज्यों की त्यों डटी रही. इस बीच बांग्लादेश जैसे कई देशो ने दुनिया भर से भारी आर्थिक मदद ले डाली रोहिंग्या को अपने देश में रखने के नाम पर जबकि वहां देह व्यापर से ले कर तमाम अनैतिक कार्य होने जारी रहे.

धीरे धीरे यही रोहिंग्या साजिशन भारत के तमाम कोनो में बसाए जाने लगे और देश को इसकी कानो कान भनक नहीं हुई.. इन्होने देश में कई अपराध कर डाले और यहाँ के तमाम एजेंटो ने इनके आधार कार्ड से ले कर पासपोर्ट तक बनवा डाले.. लेकिन अचानक ही मयन्मार से आई एक खबर ने एक बार फिर से दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया. दुनिया भर में घुसपैठ की मंशा रखने वाले रोहिंग्या को म्यांमार में भी हिस्सा और जमीन चाहिए थी जो उनके लिए बेहद मुश्किल हो गई है. ताजा समाचार मिलने तक म्यांमार की फौजों ने रोहिंग्याओ के तमाम आशियाने को उजाड़ दिया है और उनकी घरों को समतल कर के वहां पुलिस के रहने के आवास आदि बना डाले हैं.

म्यांमार में कई जगहों पर रोहिंग्या मुसलमानों के गांवों को उजाड़ दिया गया है और उनकी जगह पुलिस छावनी, सरकारी इमारतें और शरणार्थी पुनर्वास शिविर बना दिए गए हैं. साल 2017 में एक सैन्य अभियान के दौरान सात लाख से ज़्यादा रोहिंग्या मुसलमानों को पलायन करना पड़ा था. संयुक्त राष्ट्र ने इसे “नस्ली सफ़ाया” क़रार दिया था लेकिन म्यांमार ने अपने सुरक्षाबलों पर लगे आरोपों से इनकार किया था. रखाइन वो इलाका है, जहां मुख्य रूप से रोहिंग्या मुसलमानों की आबादी रहती थी.

 

 


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