बीजेपी के खिलाफ और मुखर हुई शिवसेना.. सरकार बनाने को लेकर कहा कुछ ऐसा जिसमें लिया पैसा, ईडी तथा पुलिस का नाम


महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर बीजेपी तथा शिवसेना के बीच तकरार चरम पर पहुँच गई है. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद से ही बीजेपी पर लगातार निशाना साध रही शिवसेना ने अब बीजेपी पर करारा हमला बोला है. जिस तरह से शिवसेना बीजेपी के खिलाफ मुखर हो रही है, उससे ये आशंकाएं घर करने लगी हैं कि शायद बीजेपी तथा शिवसेना का गठबंधन टूट सकता है. शिवसेना ने कहा है कि वह बीजेपी के सामने झुकेगी नहीं तथा बीजेपी को ईडी, पुलिस, पैसा, धाक के दम पर अन्य पार्टियों के विधायक तोड़कर सरकार बनानी पड़ेगी.

महाराष्ट्र में नई गठबंधन सरकार के गठन में सीएम पद को लेकर जारी खींचतान पर शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. शिवसेना ने सामना में लिखा है कि महाराष्ट्र का चुनाव परिणाम स्पष्ट है. भारतीय जनता पार्टी को 105 सीटें मिलीं. शिवसेना साथ नहीं होती तो यह आंकड़ा 75 के पार नहीं गया होता. ‘युति’ थी इसलिए गति मिली. ‘युति’ थी तब इसे कितनी सीटें मिली इसकी बजाय चुनाव से पहले ‘युति’ करते समय क्या करार हुआ था, वो महत्वपूर्ण है. शिवसेना को 56 सीटें मिलीं लेकिन श्री फडणवीस पहले निर्धारित शर्तों के अनुरूप शिवसेना को ढाई साल मुख्यमंत्री पद देने को तैयार नहीं हैं.

सामना में लिखा है कि पदों का समान बंटवारा ऐसा रिकॉर्ड पर बोले जाने का सबूत होने के बावजूद बीजेपी के देवेंद्र फडणवीस पलटी मारते हैं और पुलिस, सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग की मदद से सरकार बनाने के लिए हाथ की सफाई दिखा रहे हैं. ये लोकतंत्र का कौन-सा उदाहरण है? 24 तारीख को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद उसी दिन मुख्यमंत्री फडणवीस को बड़े अभिमान से ‘मातोश्री’ में जाकर पहले चर्चा शुरू करनी चाहिए थी. वातावरण तनावपूर्ण नहीं हुआ होता लेकिन 105 कमलों का हार मतलब अमरपट्टा कौन इसे छीनेगा?

सामना में लिखा गया है कि वर्ष 2014 की तरह शिवसेना तमाम शर्तें मान लेगी, सभी इस भ्रम में रहे. इस भ्रम को उद्धव ठाकरे ने पहले 8 घंटों में दूर कर दिया. वर्ष 2014 में शिवसेना सत्ता में शामिल हुई. अब शिवसेना वो जल्दबाजी नहीं दिखाएगी तथा घुटने टेकने नहीं जाएगी, ऐसी नीति उन्होंने अपनाई तथा व्यर्थ चर्चा का दरवाजा बंद कर दिया. शिवसेना के बगैर बहुमत होगा तो सरकार बना लो, मुख्यमंत्री बन जाओ!’ यह सीधा संदेश श्री उद्धव ठाकरे ने दिया. श्री देवेंद्र फडणवीस के लिए आज पार्टी में कोई विरोधी अथवा मुख्यमंत्री पद का दावेदार शेष नहीं है. यह एक अजीबोगरीब संयोग है.

सामना में लिखा गया है कि श्री गोपीनाथ मुंडे आज होते तो महाराष्ट्र का दृश्य अलग दिखा होता तथा मुंडे मुख्यमंत्री बन ही गए होते तो युति में आज जैसी कटुता नहीं दिखी होती. श्री मुंडे का निधन हो गया. एकनाथ खडसे को पहले ही हाशिए पर डालकर खत्म कर दिया गया. इसके लिए गिरीश महाजन ने इंतजाम किया. अब ‘मुक्ताई नगर’ निर्वाचन क्षेत्र से खडसे की बेटी को भी पराजित कर दिया गया. पंकजा मुंडे पराजित हो गईं. विनोद तावड़े को घर बैठा दिया गया तथा चंद्रकांत पाटील को मुश्किलों में डाल दिया गया. फिर भी देवेंद्र फडणवीस सरकार नहीं बना सके तथा एक-एक निर्दलीय को जमा कर रहे हैं परंतु इस गुणा-गणित से 145 एकत्रित हो जाएंगे क्या?

 


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