मंगलकामनाएं दीजिये जापान की यूरी को जिन्होंने जीवनसाथी चुना है झारखंड के सुन्दरम को तथा भारत को बना लिया अपना घर


देश के अंदर के ही कुछ लोग हैं जिन्हें दुनिया का सबसे खूबसूरत देश कहा जाने वाला भारत असहिष्णु लगता है तथा जिन्हें हिंदुस्तान में डर लगता है. ये लोग कहते हैं कि हिंदुस्तान में मोहब्बत की जगह नफरत ने ले ली है तथा इससे ये लोग डरने लगे हैं. लेकिन जापान की यूरी ऐसा नहीं मानती तथा वह अब भारत की बहू बन चुकी हैं. यूरी ने अपने प्यार के साथ उस धर्म तथा राष्ट्र को भी अपनाया है जो संसार को शांति , प्रेम और भाईचारे का मार्ग दिखलाता है.

आपको बता दें कि झारखंड के धनबाद जिले के कुमार सुंदरम और जापान की यूरी दोनों बुधवार को परिणय सूत्र में बंध गये. सरायढेला स्थित प्रभु दर्शन अपार्टमेंट में रहने वाले कुमार सुंदरम जापान के टोकियो में बैंकर्स का जॉब करते हैं. यूरी से उनका संपर्क पिछले कई सालों से है. दोनों में पहले दोस्ती हुई और फिर प्यार हो गया. एक साल दोनों ने एक दूसरे को अच्छे से समझने के बाद विवाह करने का निर्णय लिया. दोनों के परिवार वालों की भी उन्हें सहमति मिली और दोनों की शादी हो गई. विवाह में शामिल होकर कन्यादान करने के लिए यूरी के माता पिता और भाई भी धनबाद पहुंचे.

यूरी ने बताया कि यह शादी उनके लिए एक सरप्राइज की तरह है. उन्होंने कहा कि धनबाद का माहौल उन्हें अपने होम टाउन की तरह ही लगा है और इस शादी से वह तथा उनका परिवार बेहद खुश है. बता दें कि हिन्दू रीति रिवाज से दोनों का विवाह हुआ. इन्होंने कोर्ट में भी शादी की अर्जी दी है. वहीं कुमार सुंदरम ने बताया कि यूरी इंटेरियर डिजायनर हैं. एक प्रदर्शनी के दौरान पहली नजर पड़ी और बातें हुईं फिर दोनों दोस्त बन गये. दोस्ती लंबी चली फिर धीरे-धीरे प्यार हो गया.

भोजपुरी सीख रही हैं यूरी

कुमार सुंदरम ने बताया कि हम दोनों के बीच भाषा की असमानता थी. बावजूद इसके यूरी हिंदी के अलावा भोजपुरी भी सिख रही हैं. उन्होंने कहा कि इस विवाह के लिए परिवार के सभी सदस्यों की सहमति की जरूरत थी, इसलिए अपने माता-पिता से बात की साथ ही यूरी के माता-पिता से भी बात की. फिर दोनों ही सहमति बनी, तभी ये विवाह संपन्न हुआ. सुंदरम ने कहा कि यूरी ने जापान गए उनके माता-पिता की अच्छे से देखभाल की और उनके साथ बहुत तरीके से पेश आई.


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