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वाराणसी में उत्पात फ़ैलाने जमा हुई उन्मादी भीड़ के समर्थन में आई कांग्रेस.. वही कांग्रेस जो भीड़ की हिंसा को “मॉब लिंचिग” कह कर उठाती रही है सवाल


बस कुछ समय पहले अगर इतिहास में झाँक कर देखा जाय तो सडक से संसद तक भीड़ की हिंसा पर सवाल उठाने में सबसे आगे कांग्रेस रही है, बार बार देश में एक नया शब्द उछाला गया था कि भीड़ हिंसक हो गई है , न सिर्फ हिंसक बताया बल्कि हत्यारी भी कहा. उस समय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड्गे ने तो भीड़ से हिंसा करने वालों को कड़ी से कड़ी सजा की वकालत भरी संसद में कर डाली थी.. लेकिन बदलते समय के साथ कांग्रेस में बड़ा बदलाव वाराणसी में देखने को मिल रहा है.

इस बदलाव का बड़ा कारण वाराणसी का प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र भी होना हो सकता है.. यहाँ पर जुनूनी उन्मादी सोच के साथ एक भीड़ जमा होती है जो अमित शाह , नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए उतावली रहती है. उस प्रदर्शन में कौन क्या कहेगा, कौन क्या नारे लगाएगा ये भी तय नहीं था.. धर्म नगरी होने के नाते वहां पर पुलिस की सक्रियता बेहद ज्यादा थी और जैतपुर थानेदार इंस्पेक्टर शशि भूषण ने हालात को फ़ौरन बिना एक लाठी चलाए ही काबू किया.

यकीनन पुलिस की सक्रियता से एक बड़ी साजिश के ध्वस्त होने के बाद उस साजिश के सूत्रधारों को तकलीफ हुई होगी क्योकि पिछले काफी समय से सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार किया जा रहा था. लेकिन अचानक ही जो कुछ दिखा वो अप्रत्याशित था.. इस मामले में अचानक ही कांग्रेस की इंट्री होती है और विधान परिषद के सदस्य (MLC) दीपक सिंह बजाय कि भीड़तंत्र को सतकर्ता से काबू करने वाले पुलिस बल की सराहना करने के, पुलिस के खिलाफ ही बयानबाजी करना शुरू कर दिए.

दीपक सिंह ने उन्मादी भीड़ के खिलाफ कुछ बोलने के बजाय सीधे सीधे जैतपुर इंस्पेक्टर के द्वारा भीड़ का उन्माद रोकने की कार्यशैली पर ही सवाल उठाने शुरू कर दिए और उन्होंने तो इस मामले को विधान परिषद में उठाने की बात कह डाली. इस एलान को उन्होंने बाकायदा एक ट्विट के माध्यम से किया था जिसके नीचे उनका व्यापक विरोध भी शुरू हो गया. सोशल मीडिया पर इंस्पेक्टर जैतपुर का जबर्दस्त समर्थन देखने को मिल रहा है और तमाम लोग उत्तर प्रदेश पुलिस के शीर्ष नेतृत्व से उनको पुरष्कृत करने की मांग भी कर रहे हैं.

क्या दीपक सिंह के इस एलान ने भीड़ के मामले में कांग्रेस की मंशा को स्पष्ट जैसा कर दिया है ? ये अब एक बड़ा सवाल बनता जा रहा है. क्या MLC दीपक सिंह अपने ही उच्च नेतृत्व विशेष रूप से मल्लिकार्जुन खड्गे और राहुल गांधी के बयान से सहमत नहीं हैं जिसमे उन्होंने देश में बढ़ते भीड़तंत्र पर चिंता जताई है और सरकार से उसको प्रभावी रूप से काबू करने की मांग की है ? फिलहाल उनकी मांग पर वाराणसी पुलिस इंस्पेक्टर जैतपुर की भूमिका की जांच के आदेश जारी कर चुकी है जो सोशल मीडिया पर लोगों को नागवार गुजर रही है.

 

पहले देखिये राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले कांग्रेस के MLC दीपक सिंह का एलान –

अब देखिये वो वीडियो जिसमे एक भीड़ को कोई हरकत करने से पहले ही बहुत कम संख्या में मौजूद पुलिस बल के साथ कैसे काबू किया इंस्पेक्टर जैतपुर शशि भूषण ने


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