वीर सावरकर को आदर्श मानने वाली पार्टी भगवावादी पार्टी के आगे कांग्रेस का समर्पण.. बोली- “आप साथ आओ, मुख्यमंत्री आपका”


महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के परिणाम को आये हुए एक सप्ताह से ज्यादा का समय गुजर चुका है लेकिन अभी तक सरकार का गठन नहीं हो सका है. वैसे तो बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को सरकार बनाने लायक पूर्ण बहुमत मिला है लेकिन पेंच मुख्यमंत्री पद को लेकर फंसा हुआ है. मुख्यमंत्री पद को लेकर शिवसेना तथा बीजेपी के बीच तनातनी जारी है. शिवसेना जहाँ 50-50 फ़ॉर्मूले के तहत दोनों पार्टियों के ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री को लेकर अड़ी हुई है तथा आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाना चाहती है. वहीं बीजेपी कह चुकी है कि देवेन्द्र फडणवीस ही पूरे 5 साल के लिए मुख्यमंत्री होंगे.

बीजेपी-शिवसेना के बीच जारी इस आंतरिक घमासान के बीच कांग्रेस पार्टी ने ट्विस्ट ला दिया है. कांग्रेस पार्टी ने शिवसेना को खुला ऑफर दिया है कि शिवसेना अगर हमारे साथ आती है तो ढाई नहीं बल्कि पूरे 5 साल के लिए उन्हीं का मुख्यमंत्री होगा. कांग्रेस द्वारा शिवसेना को समर्थन का ऑफर देने के बाद सियासी हलकों में हलचल मच गई है. सवाल पूंछा जा रहा है कि बीजेपी को सत्ता में आने से रोकने के लिए कांग्रेस उस भगवावादी पार्टी शिवसेना को समर्थन देना चाहती है जो वीर सावरकर के आदर्शों को मानती है. ये सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि कांग्रेस सावरकर का विरोध करती है.

शिवसेना को खुला ऑफर देते हुए कांग्रेस के सीनियर नेता तथा राज्यसभा सांसद सैन दलवई ने कहा कि अगर शिवसेना हमारे साथ आती है तो मुख्यमंत्री उन्हीं का होगा. हुसैन दलवई ने कहा कि अगर शिवसेना ढाई ढाई साल के मुख्यमंत्री की बात कर रही है लेकिन बीजेपी वो मान नहीं रही है. अब शिवसेना इस पर क्या करती है ये हम लोग देखेंगे. इसके साथ ही दलवई बोले, ‘’शिवसेना अगर प्रपोजल देती है तो शिवसेना का मुख्यमंत्री बन सकता था. लेकिन उसके लिए जो डेयरिंग (हिम्मत) चाहिए वो शिवसेना के पास नहीं है.’’

हुसैन दलवई ने कहा कि शिवसेना बीजेपी से ढाई साल का मुख्यमंत्री मांग रही है लेकिन हमारा कहना है कि अगर शिवसेना हमसे हाथ मिला ले तो ढाई नहीं बल्कि पूरे 5 साल के लिए उनका मुख्यमंत्री होगा. हुसैन दलवई से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तथा महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री प्रथ्वीराज चव्हाण ने भी शिवसेना को ऐसा ही ऑफर दिया था तथा कहा था कि शिवसेना प्रस्ताव रखती है तो पार्टी हाईकमान और अन्य दलों के नेताओं के साथ चर्चा की जाएगी.


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