पीलीभीत में स्वच्छ भारत अभियान की उड़ रही हैं धज्जियां… प्रशासन नहीं ले रहा सुध

यूपी के पीलीभीत में विकास के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च कर दिए गए पर विकास कुछ नहीं हुआ. आपको बता दें कि यूपी के पीलीभीत में विकास के लिए शासन की ओर से करोड़ों रुपए दिए गए जिसमें स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण भारत ग्राम विकास विभाग तथा ग्रामीण विकास सहित कई योजनाएं शामिल है जिसके लिए सरकार ने करोड़ों रुपए दिए, परंतु अधिकारियों की लापरवाही, भ्रष्टाचार के चलते विकास नहीं हुआ जिसके कारण आज भी ग्रामीण झोपड़पट्टीओं में निवास करने को मजबूर है. बदहाली के आंसू रो रहे कई गांव तो ऐसे हैं जहां आज भी विकास के नाम पर शून्य ही रहे हैं. ऐसा नहीं है कि विकास के लिए सरकार पैसा ना देती हो सरकार पैसा तो देती है पर आते-आते पैसा समाप्त हो जाता है और विकास शून्य रह जाता है. ऐसा ही एक मामला पीलीभीत के बरखेड़ा ब्लाक के गांव जगीपुर जैतपुर का है जहाँ  विकास के नाम पर ग्रामीणों को छला गया गांव में न तो नालियां हैं और न ही सड़के वनी है प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी ग्रामीणों को नही मिला है ग्रामीणों ने वताया की वह घास फूस की झोपड़ी में जीवन यापन कर रहे हैं

वही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट स्वच्छ भारत मिशन की वात करें तो करोंडों रुपये खर्च करके गांव गांव शौचालय वववायें गए परन्तु भ्रष्टाचार के कारण शौचालयों का निर्माण ठीक से नही हुआ आधे से ज्यादा वने शौचालय मिशन पूरा होने से पहले ही जर्जर हो गए जिससे आज भी ग्रामीण खुले में शौच जा रहे हैं तो कुछ लोगों को राजनैतिक द्वेष के चलते शौचालय से वंचित रहना पड़ा. ऐसे हालतों में जिले को ओडीएफ करने का दावा करने वाले जिलाधिकारी अखिलेश मिश्र इसे कैसे पूरा करेंगे क्योंकि आज भी कई ऐसे व्लाक हैं जो पचास फीसदी भी ओडीएफ नही हो पाए हैं और कुछ ब्लाक जैसे बरखेड़ा व ललौरीखेड़ा ओडीएफ तो है पर आज भी 20प्रतिशत लोगों के पास शौचालय नही है. आपको वता दें की पीलीभीत जिले में कुल सात ब्लाक हैं जिसमें बरखेड़ा और ललौरीखेड़ा कागजों में ओडीएफ घोषित भी किए जा चुके हैं

बताया तो ये भी जा रहा है कि जब से जिलाधिकारी अखिलेश मिश्र ने चार्ज संभाला है तव से अव तक स्वच्छ भारत मिशन में लगने वाले कूड़ेदानों में जमकर घोटाला हुआ है. जहां एक कूड़ेदान की अनुमानित लागत दो हजार रुपए है वही उसके लिए सरकारी कोष से 5500-/का भुगतान हुआ. इसको लेकर जव मामला मीडिया में आया तो डीएम ने जांच के नाम पर लॉलीपॉप दे दिया और अभी तक कोई कार्रवाई नही की गई जवबकि आश्वासन दिए कई सप्ताह बीत गये. स्थानीय लोगों का कहना है कि कोई भी प्रशासनिक अधिकारी गांव देखने नही आता सुविधाओं का  लाभ पैसे वालों को दिया जाता है जो पैसे नही दे पाता उसे किसी योजना का लाभ नही दिया जाता.

Share This Post