आखिरकार बोल ही पड़ा दारुल उलूम अयोध्या मामले पर.. जबकि पहले की गईं थी भाईचारा मजबूत करने की बातें


अयोध्या पर सुप्रीम फैसला आने के बाद राजनैतिक प्रतिक्रियाएं आना शुरू हो गईं हैं. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, अयोध्या में जिस जमीन को विवादित बताया जा रहा था, दरअसल ये वो जगह है जहाँ प्रभु श्रीराम का जन्म हुआ था, इसलिए वहां मंदिर ही बनेगा. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद देशभर में खुशी का माहौल है तथा लोग सुप्रीम कोर्ट के फैसले की सराहना कर रहे हैं. इस बीच इस्लामिक तालीम के केंद्र दारुल उलूम का इस पर बयान आया है.

बता दें कि दारुल उलूम ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर हैरत जताई है. बता दें कि अयोध्या पर सुप्रीम फैसला आने से फैसले दारुल उलूम शांति तथा भाईचारे की बात कर रहा था लेकिन फैसला आने के बाद दारुल उलूम के तेवर बदल गये हैं. दारुल उलूम ने कहा है कि मस्जिद के इतने सबूत होने के बाद भी अदालत का यह फैसला पूरी तरह समझ से परे है. दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मौलाना मुफ़्ती अबुल कासिम नौमानी ने कहा कि बाबरी मस्जिद के सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला आया है वह बेहद हैरतअंगेज और समझ से परे है.

मौलाना मुफ़्ती अबुल कासिम नौमानी ने कहा कि इस कदर स्पष्ट सबूतों के बावजूद यह फैसला अक्ल में आने वाला नहीं है. दूसरी बात यह है कि मुकदमा विवादित भूमि पर मालिकाना हक को लेकर था और कोर्ट ने यह स्पष्ट नहीं किया कि जमीन का मालिक कौन है. जहां तक मस्जिद का ताल्लुक है तो हमेशा से हमारा यह ही रुख रहा है कि मस्जिद अल्लाह की मिल्कियत है और मुसलमान मस्जिद की जमीन का मालिक नहीं होता है. मौलाना ने कहा कि जिस जगह एक बार मस्जिद बन गई वह मस्जिद ही रहती है. मस्जिद की हैसियत को किसी तरह खत्म नहीं किया जा सकता है.


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