सेना के अधिकारी का ये बयान सीधा समर्थन है सुरेश चव्हाणके जी के अथक प्रयासों को जिनके लिए उन्होंने किये हैं कई बिंदास बोला


माननीय सुप्रीम कोर्ट ने पिछले अवैध संबंधों को अपराध बताने वाली धारा 497 को खतम किया, धारा 377 को ख़त्म कर समलैंगिक सबंधों को वैध घोषित कर दिया. इसके बाद वो सुदर्शन न्यूज़ ही था जिसने कोर्ट के इस फैसले पर ये कहते हुए आपत्ति जताई थी कि इससे सामाजिक व्यभिचार को बढ़ावा मिलेगा, अवैध संबंध बनाने की खुली छूट मिल जायेगी. सुदर्शन टीवी के प्रधान संपादक ने इसे लेकर कई बिंदास बोल कार्यक्रम भी किये तथा इन दोनों फैसलों को भारतीय संस्कृति तथा सभ्यता के उच्चतम मूल्यों के खिलाफ बताया था.

अब राष्ट्र रक्षक भारतीय सेना भी व्यभिचार तथा समलैंगिकता के खिलाफ खड़ी हो गई है. खबर के मुताबिक़, भारतीय सेना अनुशासन बनाए रखने के लिए समलैंगिक संबंध और व्यभिचार को दंडनीय अपराध बनाए रखना चाहती है. इसके लिए सेना ने रक्षा मंत्रालय के समक्ष अपना पक्ष रखा है. रक्षा मंत्रालय से संपर्क कर सेना ने निवेदन किया है कि सेना में समलैंगिकता तथा व्यभिचार को दंडनीय अपराध ही माना जाए. सेना के अनुशासन के लिए ये जरूरी है.

सूत्रों के अनुसार सेना ने इन कानूनों को खत्म करने के मामले में रक्षा मंत्रालय के सामने चिंता जाहिर की है. सेना ने कहा कि दोनों कृत्यों को दंडनीय रखा जाना एक निवारण की तरह है. ऐसा नहीं होने पर गंभीर गैर-अनुशासनिक काम बढ़ेंगे जो समस्या पैदा कर सकते हैं. भारतीय सेना में सहायक जनरल जनरल अश्विनी कुमार ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कुछ मामले ‘कानूनी तौर पर सही लेकिन नैतिक रूप से गलत’ हो सकते हैं. कुमार ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट ने जो कुछ भी कहा है, वह जमीन का कानून है लेकिन सेना के बीच इस तरह के कानून कई बार अनुशासन को खत्म कर सकते हैं.

गुरुवार को सेवानिवृत्त हुए अश्विनी कुमार ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट की ओर से कही गई कोई भी बात देश का कानून है और उसे मानना बाध्यकारी है.’ जब उनसे पूछा गया कि क्या सेना फैसले की समीक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी, अश्विनी कुमार ने कहा, ‘आपको कैसे पता कि हमने पहले ही यह नहीं किया?’ उन्होंने कहा, सेना समलैंगिकता और व्यभिचार के मामलों से सेना के संबंधित कानून के आधार पर निपटारा करती है और इसमें अनुचित कार्य करने वाले अधिकारी को सजा देने का प्रावधान है.

अश्विनी कुमार ने कहा, ‘जो अधिकारी समलैंगिक संबंध बनाने के आरोपी होंगे अब उनके खिलाफ सेना कानून की धारा-46 के तहत नहीं बल्कि धारा-45 (उम्मीद के विपरीत व्यवहार कर पद का दुरुपयोग करना एवं खराब आचरण) के तहत मामला चलेगा. धारा-46 में क्रूर, अश्लील और अप्राकृतिक कृत्य करने पर सजा का प्रावधान है. अश्विनी कुमार ने कहा, ‘नैतिक अधमता और भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.’ इससे पहले सेना प्रमुख बिपिन रावत ने कहा था कि सेना में समलैंगिक संबंध और व्यभिचार की इजाजत नहीं दी जाएगी.


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