कश्मीर की वो बेटियां जिनकी शादी हुई दूसरे राज्यों में, अब वो मुस्कुरा उठीं.. आखिर उन्हें मिला है एक नया हक़


जम्मू कश्मीर अब पूरी तरह से भारत का हिस्सा बन चुका है. कल 31 अक्टूबर को जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख दो केंद्र शासित प्रदेश बन गये हैं. जम्मू कश्मीर से 370 हटने तथा केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद राज्य की वो बेटियां मुस्कुरा उठी हैं, जिनकी शादी जम्मू कश्मीर के बाहर अन्य राज्यों में हुई हैं. जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के साथ दूसरे राज्यों में ब्याही गईं जम्मू-कश्मीर की बेटियों को शादी के बाद भी तमाम अधिकार मिल सकेंगे.

बता दें कि अभी तक जम्मू कश्मीर में आर्टिकल 370 लगा हुआ था जिसके कारण वहां की बेटियों के नाम जारी होने वाले स्टेट सब्जेक्ट (स्थायी नागरिकता प्रमाण पत्र) में वैलिड टिल मैरिज लिखा जाता था. जम्मू-कश्मीर से बाहर शादी होते ही बेटियों के नागरिकता समेत पैतृक संपत्ति के तमाम अधिकार खत्म हो जाते थे. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा.  केंद्र शासित प्रदेश बनने पर अब दूसरे राज्यों में शादी करने वाली यहां की बेटियाँ फूली नहीं समा रही हैं. उनका कहना है कि उन्हें अब दोयम दर्जे की नागरिकता से निजात मिली है.

पंजाब के पठानकोट क्षेत्र में 1999 में शादी करने वाली जम्मू की रमा कुमारी का कहना है कि नई व्यवस्था से बेटियों को लाभ मिला है. दूसरे राज्यों में शादी के बाद अधिकार के लिहाज से उन्हें बेदखल कर दिया जाता था. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. वे अपने पैतृक स्थान पर भी सभी अधिकारों की हकदार बनी हैं. यह उन बेटियों(हिन्दू हों या मुस्लिम) के लिए सबसे सुखद समाचार है जिनके जीवन में कोई अनहोनी हुई और वे वापस पैतृक स्थल पर पहुंचकर अपने अधिकार नहीं पा सकी हैं. न्यायालय में ऐसे सैकड़ों मामले विचाराधीन हैं.

बता दें कि पहले जम्मू-कश्मीर में पहले 35-ए लागू था जिसके तहत यहां की बेटियों की शादी दूसरे राज्य में होने से उन्हें नागरिकता खोनी पड़ती थी. लेकिन अब उन्हें जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीदने, पैतृक संपत्ति पर हक रखने आदि अधिकार प्राप्त हुए हैं. नये जम्मू-कश्मीर में स्टेट सब्जेक्ट की अनिवार्यता और कानून दोनों खत्म हो गए हैं. 2016 में राजस्थान में शादी करने वाली (मौजूदा सूरत में बसी) मृदुल वर्मा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में नई सुबह की शुरुआत होने से बेटियों के लिए खासतौर पर खुशी की बात है.

उन्होंने बताया कि वह बेटी जो आधी उम्र मां बाप के पास गुजारती है, लेकिन जम्मू-कश्मीर के बाहर शादी करने पर उन्हें कोई अधिकार नहीं दिए जाते थे. वे भी जम्मू-कश्मीर में समान अधिकारों के लिए हकदार होंगी. चाहे हिन्दू हो या मुस्लिम या किसी और मत-मजहब को मानने वाली… सभी बेटियां इस ऐतिहासिक फैसले से लाभान्वित होंगी.


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