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समाज के रक्षक पुलिसकर्मियों के सम्मान में इतना खुलकर बोलने वाले पहले गृहमंत्री बने अमित शाह.. सुदर्शन न्यूज़ लगातार दिखाता रहा है पुलिस वालों की पीड़ा


समाज के रक्षक पुलिस के जवानों की जिस पीड़ा को सुदर्शन न्यूज़ हमेशा से उठाता रहा है वो आवाज अब केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बयानों तक भी पहुँच गई है. हमारे समाज में पुलिस को लेकर नकारात्मक धारणा बना दी गई है. पुलिस का नाम सामने आते ही लोग नाक-भौंह सिकोड़ने लगते हैं. अक्सर पुलिस वालों को गलत समझा जाता है, उन्हें गालियां दी जाती हैं, उन्हें निशाना बनाया जाता है. इस सबके बाद भी जब समाज पर कोई संकट आता है तो सबसे पहले पुलिस को ही याद किया जाता है.

समाज की सच्ची सेवक पुलिस को लेकर बनी नकारात्मक धारणाओं के बीच पुलिसवालों के समर्थन में गृहमंत्री अमित शाह ने ऐसा बयान दिया है, जो अभी तक किसी गृहमंत्री ने नहीं दिया. दिल्ली पुलिस के नए मुख्यालय का उद्घाटन करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने सबसे पहले इस्लामिक आतंकियों से लड़ते हुए बलिदान हुए दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहनचंद्र शर्मा सहित अन्य बलिदानी पुलिस के जवानों को श्रद्धांजलि दी तथा समाज की रक्षा के लिए किये जा रहे पुलिस के जवानों के त्याग को सैल्यूट किया.

31 अक्टूबर को सरदार पटेल जयंती पर दिल्ली पुलिस के मुख्यालय का उद्घाटन करते हुए अमित शाह ने कहा कि 70 साल बाद दिल्ली पुलिस को अपना मुख्यालय में मिला है. मैं बधाई देता हूं… सरदार पटेल की जयंती के दिन इसका उद्धाटन गर्व की बात है. पुलिस विभाग की तारीफ करते हुए गृहमंत्री ने कहा कि पुलिसकर्मी अपने प्राणों की चिंता करे बिना देश की सुरक्षा में लगे रहते हैं. उन्होंने कहा कि सभी विभागों में अगर कोई एक विभाग घड़ी देखे बिना काम करता है तो वह पुलिस विभाग है. हमने उनको अधिकार नहीं दिया घड़ी देखने का. इस दौरान शाह काफी ज्यादा भावुक हो गए.

गृहमंत्री शाह ने आगे कहा कि देश की 125 करोड़ जनता की सुक्षा करने वाली पुलिस हमें नहीं दिखाई पड़ती. जब हम सब गाड़ी में बैठकर भैया दूज मनाने अपनी बहन के यहां जा रहे होते हैं तो चौराहे पर खड़ा कांस्टेबल या हवलदार हमें दिखाई नहीं देता जो ट्रैफिक की व्यवस्था करता है. क्या हमारे दिल में नहीं आता कि इसकी भी बहन होगी. उन्होंने कहा होली, दिवाली हर त्यौहार पर पुलिसवाले अपना घर परिवार छोड़कर हमारी सुरक्षा कर रहे होते हैं. उनके भी बच्चे सोचते होंगे कि पापा हमारे साथ दीपावली मनाएं. लेकिन उस समय भी पुलिस के जवान हमारी रक्षा कर रहे होते हैं.

गृहमंत्री शाह ने कहा कि मीडिया अक्सर पुलिस को कोसती है कि पुलिस की तोंद बढ़ी है ये है वो है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पुलिसकर्मी ने अपनी 35 साल की ड्यूटी में पता नहीं किस दिन टाइम से जाकर अपनी बीवी और बच्चों के साथ खाना खाया होगा ? वो रात के तीन बजे खड़ा होकर ठेले से पावभाजी खाता है. आखिर इसे मीडिया क्यों नहीं दिखाती ? अमित शाह ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि हमें पुलिस को सकारात्मक नजरिए से देखना चाहिए. इसके साथ ही गृहमंत्री ने पुलिसकर्मियों को नसीहत भी दी कि भवन से ज्यादा अहम होती है भावनाएं, हमें अच्छी भावनाएं रखनी चाहिए. उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों को तमाम आलोचनाओं के बाद भी अपना काम ईमानदारी से करते रहना चाहिए.


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