कुलभूषण जाधव मामले में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के जज की ये टिप्पणी साबित करेगी पाकिस्तान की नीचता को


कुलभूषण जाधव मामले में इंटरनेशनल कोर्ट ने पाकिस्तान को लेकर जो टिप्पणी की है वो पाकिस्तान की नीचता बताने के लिए काफी है. इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) के जज अब्‍दुलकावी अहमद युसूफ ने यूनाइटेड नेशंस (यूएन) को बताया है कि पाकिस्‍तान ने भारतीय कैदी कुलभूषण जाधव मामले में विएना संधि के आर्टिकल 36 का उल्‍लंघन किया है. इसके अलावा पाक ने केस में सही प्रक्रिया का पालन नहीं किया है. 3 सदस्यों वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA)) के सामने आईसीजे की रिपोर्ट को पेश किया.

ICJ के जज युसूफ ने अपने 17 जुलाई को आए फैसले में कहा कि संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख न्यायिक अंग ने पाकिस्तान को वियना संधि के नियम 36 के तहत अपने कर्तव्यों का उल्लंघन किया है. उसने इस मामले में आवश्यक कदम नहीं उठाए. आईसीजे ने पाकिस्तान से कुलभूषण जाधव की मौत की सजा पर दोबारा विचार करने के लिए कहा है. ज्ञात हो कि जाधव भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं जिन्हें पाकिस्तान ने कथित जासूसी और आतंकवाद के आरोपों को लेकर मौत की सजा सुनाई है. पाकिस्तान ने जाधव के मामले का ट्रायल अप्रैल 2017 को बंद कर दिया था.

आईसीजे में भारत ने कहा था कि 1963 की वियना संधि के अनुसार उनके नागरिक कुलभूषण जाधव को मिलने वाली राजनयिक पहुंच नहीं दी गई. युसूफ के नेतृत्व वाली पीठ ने अपने आदेश में पाकिस्तान को कुलभूषण सुधीर जाधव मामले में सजा की समीक्षा और पुनर्विचार करने का आदेश दिया है. जाधव मामले में यूएनजीए के समक्ष रिपोर्ट पेश करते हुए युसूफ ने कोर्ट के फैसले के कई पहलुओं पर विस्तार से बताया.

ICJ के जज यूसुफ़ ने UNGA को बताया कि बताया कि अदालत को यह देखना था कि वियना संधि के नियम 36 के अनुसार राजनयिक पहुंच को लेकर कोई अधिकार है, क्या ऐसी परिस्थिति में जब किसी व्यक्ति पर जासूसी करने का शक हो तो उसे इन अधिकारों से वंचित किया जा सकता है? अदालत ने पाया कि वियना संधि में जासूसी के मामलों का कोई संदर्भ नहीं है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को हर हाल में कुलभूषण जाधव मामले में काउंसलर एक्सेस देना चाहिए था.


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