आज ही के दिन पूरा महाराष्ट्र और भारत का हर हिंदूवादी एक साथ रो कर बोला था – “अनाथ हो गये हम”


ये वो समय था जब हिन्दू या हिंदुत्व की बात करने वालों को भरी सभा से निकाल दिया जाता था और उस पर साम्प्रदायिक शक्ति होने का आरोप लगाया जाता था.. हिन्दू शब्द आते ही जिस प्रकार से नेताओ की नाक भौं सिकुड़ जाती थी उसके गवाह आज भी कई लोग मिल जायेंगे.. ठीक इसी मौके का फायदा उठा कर महाराष्ट्र के एक बड़े हिस्से पर दाऊद इब्राहीम , अबू सलेम , टाईगर मेमन जैसे दरिन्दे अपने पैर पसारते चले जा रहे थे और राजनीति केवल हिंदुओं के दमन में व्यस्त रही.

ठीक उसी समय शेर जैसी गर्जना के साथ एक नाम उठा जिसका नाम था बाल ठाकरे.. इस नाम में साहब खुद से ही उनके चाहने वालों ने लगा दिया और बाला साहब ठाकरे वो नाम बन गये जो कम से कम महाराष्ट्र की राजनीति को अपने दम पर मोड़ डाले.. अब वहां किसी की हिम्मत नहीं थी हिन्दुओ को अपमानित करने की. अब वहां जय भवानी और जय शिवाजी के नारों की आवाज और बुलंद हो गई थी.. अब वहां पर भगवा वस्त्र और हाथ में रुद्राक्ष की माला ले कर चलने वाले लोग दिखाई देने लगे थे..

साहब एक पर्याय बन गये हिंदूवादी राजनीति के.. हिन्दू समाज को वर्ष १९९३ के दंगो में अगर कोई सहारा था तो एकलौते बाला साहब ..उन्होंने जिस प्रकार से अपने शिवसैनिको के साथ अधर्म का सामना किया उसकी नजीर आज तक नही मिली है.. लेकिन अचानक ही आज के ही दिन 7 वर्ष पहले सन २०१२ में वो सिंह सदा के लिए खामोश हो गया था.. वो ख़ामोशी न जाने कितने लोगो के दिल और दिमाग पर एक साथ वज्र की तरह गिरी थी और जो जहाँ था वहीँ से मातोश्री की तरफ भागा..

वो पहली बार ऐसा समय था जब पूरा महाराष्ट्र एक साथ भारत के कोने कोने से हिंदुवादियो के साथ एक स्वर में बोल पड़ा था कि हम अनाथ हो गये.. हिन्दू समाज के ऊपर रहने वाली वो छत्रछाया अंतिम यात्रा के रूप में जिधर से भी गुजरी उधर ही दहाड़े मार मार कर रोते लोगों ने कहा – आपले साहेब गेले.. आज भी वो छवि महाराष्ट्र की जनता और देश के हर हिंदूवादी के दिलों में है और शायद कोई ताकत ऐसी नहीं है जो जन्मजन्मान्तर तक उसको हिला या भुला पाएगी..

बाला साहब ठाकरे जी को पुण्यतिथि पर शत शत नमन…


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