धारा 497 ख़त्म होने का अदालत में विरोध करेगी सेना.. सिर्फ सुदर्शन न्यूज़ ने उठाई थी इसके विरोध में आवाज


पिछले साल सब माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अवैध संबंधों को अपराध बताने वाली धारा 497 को खतम किया तो वो सुदर्शन न्यूज़ ही था जिसने कोर्ट के इस फैसले पर ये कहते हुए आपत्ति जताई थी कि इससे सामाजिक व्यभिचार को बढ़ावा मिलेगा, अवैध संबंध बनाने की खुली छूट मिल जायेगी. अब सिर्फ सुदर्शन ही नहीं बल्कि हिन्द की रक्षक भारतीय सेना भी धारा 497 ख़त्म होने के खिलाफ खड़ी हो गई है.

खबर के मुताबिक़, भारतीय सेना पिछले वर्ष एडल्‍ट्री से जुड़े कानून 497 पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नाखुश है. उसका मानना है कि एडल्‍ट्री यानी व्‍याभिचार से जुड़ा कानून खत्‍म होने पर सेना में अलग-अलग रैंक्‍स के ऑफिसर्स के बीच अनुशासनहीनता को बढ़ावा मिलेगा, जिससे सेना में समस्याएं बढेंगी. माना जा रहा है सुप्रीम कोर्ट में सेना इसके खिलाफ अपील कर सकती है, जिसमें मांग की जाएगी की सेना को इस फैसले से बाहर रखा जाए. यह जानकारी दो अधिकारियों ने दी.

बता दें कि पिछले साल 27 सितंबर को उच्चतम न्यायालय के तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से व्यभिचार से संबंधित दंडात्मक प्रावधान को असंवैधानिक करार देते हुए उसे मनमाना और महिलाओं की आजादी को ठेस पहुंचाने वाला बताते हुए निरस्त कर दिया था. इस धारा के ख़त्म होने के बाद अब अगर शादीशुदा महिला-पुरुष किसी गैर शादीशुदा से संबंध बनाते हैं तो वह अपराध नहीं है.

धारा खत्म होने के बाद सेना अपनी रैंकों के बीच अनुशासन को लेकर चिंतित है. सेना में अपने साथी अधिकारी की पत्नी के साथ किसी तरह का संबंध बनाने को गंभीर अपराध माना जाता है. जिसे कायरता से भी नीचे समझा गया है. इस अपराध में मौत तक की सजा दी जा सकती है. अदालत के आदेश के बाद धारा 497 को खत्म कर दिया गया है और इसे अब अपराध नहीं माना जाता. तीनों सेनाओं में व्यभिचार को अपराध माना गया है और अभियोजन आमतौर पर आरोपी अधिकारी को सेना से बाहर निकलवा देता है.

सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘धारा 497 को खत्म होने से कुछ मुश्किल परिस्थितियां पैदा हो गई हैं.’ अधिकारी ने कहा, ‘अधिकारी और जवान महीनों अपने परिवार से दूर रहते हैं और एक-दूसरे का ख्याल रखते हैं. इस तरह के व्यवहार से बचने के लिए कुछ निवारक होने चाहिए.’


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