250 आतंकियों के पास अब अंतिम रास्ता “मौत” … वो भाग ही नहीं सकते जीवित शरीर के साथ


आर्टिकल 370 हटने के साथ ही कश्मीर पूर्ण रूप से भारत का हो चुका है. अब भारत सरकार का लक्ष्य है कश्मीर से देश के दुश्मन इस्लामिक आतंकियों का खात्मा करना. हालाँकि भारतीय सेना आतंकियों के खात्मे के लिए ऑपरेशन आलआउट पहले से ही चला रही है लेकिन अब सेना ने दूसरे लक्ष्य तय किये हैं. अब कश्मीर में छिपे करीब 250 इस्लामिक आतंकि अपने शरीर के साथ जीवित भाग ही नहीं सकेंगे. इन आतंकियों के पास अंतिम रास्ता बचा है तथा वो रास्ता है मौत.

दूसरे शब्दों में कहा जाए तो इस बार की सर्दियों में कश्मीर घाटी में गर्मी रहने के आसार हैं. देश की सुरक्षा एजेंसियों ने कश्मीर में छुपे करीब 250 पाकिस्तानी आतंकियों को घेरकर मारने का ताजा खाका तैयार किया है. योजना है कि ठंड के मौसम में जब पूरी घाटी बर्फ से ढंकी होती है और सभी प्रशासनिक काम काज जम्मू से संचालित होते हैं तब आतंकियों के खिलाफ सघन सफाई अभियान चलाया जाए तथा  इन आतंकियों का खात्मा किया जाए. इसके लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) और गृहमंत्रालय की साझेदारी में ठोस योजना तैयार की गई है.

सुरक्षा मामले से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा हासिल करने के बाद घाटी में हालात तेजी से सामान्य होने के ठोस संकेत मिल रहे हैं. वहां के युवक एक दो दिन पहले अर्धसैनिक बल बीएसएफ के नियुक्त कैंप में बड़ी संख्या में हिस्सा लिया. रिपोर्ट के मुताबिक कुछ तबके को छोड़ आम लोग और व्यापारी-व्यवसायी सामान्य स्थिति में वापस आने के लिए बेताब हैं. ऐसे में आतंकी एक बड़ी अड़चन है.

सूत्रों के मुताबिक घुसपैठ लगभग रुक चुका है. बर्फ जमने के बाद पाकिस्तान के लिए घुसपैठ कराना और भी मुश्किल हो जाएगा. समस्या घाटी के दूर दराज इलाके में पहले से करीब 250 पाकिस्तानी हैं. लोगों और पंचायत व सिविल चुनावों में जीते उम्मीदवारों में कहीं ना कहीं आतंकियों का भय है. यह सामान्य तौर पर अपना काम नहीं कर पा रहे। इस वजह से संचार व्यवस्था जैसी सुविधाओं में अभी भी सख्ती बरतनी पड़ रही है.

सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान में प्रशिक्षित आतंकी अक्सर कमांडों ट्रेनिंग लिए होते हैं. वह घाटी के जंगलों में लंबे समय तक रह सकते हैं. लेकिन बर्फ ढकने के बाद उनकेलिए जंगल में रहना मुश्किल होगा. ऐसे में वह महफूज जगह की तालाश में गांव की तरफ आएंगे। उनके लिए सीमा पार पर वापस पीओकेजाना लगभग नामुमकिन है. अगर वह ऐसा करते भी हैं तो सेना केहाथों मारे जाएंगे. सेना ने एक ख़ास अभियान के तहत इन आतंकियों के खात्मे की योजना बनाई है.


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