चीन के खिलाफ भारत के मुसलामानों की उठी आवाज.. डोकलाम पर दादागीरी के चलते नहीं, मामला कुछ और ही है


दोस्ती की आड़ में गद्दारी के लिए कुख्यात भारत के पड़ोसी मुल्क चीन के खिलाफ भारत के मुसलमानों ने आवाज उठाई है. लेकिन चीन के खिलाफ भारत के मुसलमानों की ये आवाज डोकलाम में चीन की दादागीरी तथा लद्दाख को लेकर चीन की साजिश के खिलाफ नहीं है बल्कि चीन में उइगर मुस्लिमों की स्थिति को लेकर है. ज्ञात हो कि लंबे समय से चीन से खबरें सामने आती रही हैं कि वहां की सरकार मुस्लिमों को प्रताड़ित करती है, मुस्लिमों को उनकी मजहबीकार्यों से जबरन दूर कर रही है, मस्जिद तथा मदरसों पर ताले लगा रही है.

चीन में मुसलमानों की यही स्थिति तथा उनके मजहबी स्थल, मदरसों पर तालाबंदी के विरोध में यूपी के बरेली कलेक्ट्रेट पर इस्लामिक उलेमा और सामाजिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया. चीन में मुस्लिम महिलाओं को बुर्का पहनने पर पाबंदी लगाने पर भी नाराजगी जाहिर की गई तथा प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा. तंजीम उलमा-ए-इस्लाम के महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि चीन में मुसलमानों पर जुल्म किया जा रहा है. बेगुनाह लोगों को जेलों में कैद किया जा रहा है.

भारत सरकार से हमने मांग करते हुए कहा कि चीन में मुसलमानों पर हो रहे जुल्मों पर दखल दें. वहां नमाज पढ़ने, रोजा रखने पर रोका जा रहा है. वहां के मुसलमानों को इस्लाम के खिलाफ बोलने के लिए मजबूर किया जा रहा है. मस्जिद, मदरसों में ताले डाल दिए गए हैं। मुस्लिम महिलाओं के बुर्का पहनने पर रोक लगा दी गई है. समाजसेवी नाजिम बेग ने कहा कि चीन में मानवाधिकारों और धार्मिक अधिकारों के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया जा रहा है. इस संबंध में प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन कलेक्ट्रेक्ट पहुंचकर अधिकारियों को दिया है.


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