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इस्लामिक देश के सर्वोच्च नेता ने किया एलान- नष्ट कर देंगे इजराइल को.. वहीं यहूदियों के बारे में कही ये बात


इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ सबसे अधिक आक्रामक कार्यवाई के लिए विख्यात देशों की सूची बनाई जाए तो उसमें निश्चित रूप से इजरायल का नाम शीर्ष पर होगा. यही कारण है इजरायल को इस्लामिक जगत का सबसे बड़ा दुश्मन माना जाता है. लगभग सभी मुस्लिम देशों के न सिर्फ सियासी नेता बल्कि वहां की आम जनता भी इजराइल से नफरत करती हुई नजर आती है, या इसको ये भी कह सकते हैं कि वहां कट्टर मजहबी नेता अपने जनमामस को इजराइल के खिलाफ भड़काते हैं.

इजरायल के खिलाफ इस्लामिक जगत की नफरत कितनी है इसका उदहारण ईरान से आया है जहाँ के शीर्ष नेता ने इजरायल को नष्ट करने की धमकी दी है. ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनी ने इस्राइल को धमकी देते हुए कहा है कि ईरान द्वारा एक देश के रूप में इस्राइल को नष्ट करने का मतलब यहूदियों को नष्ट करना नहीं है. उन्होंने कहा कि ईरान यहूदियों को नष्ट नहीं करना चाहता है लेकिन सभी धर्मों के लोगों को इस्राइल का भविष्य तय करना चाहिए.

ईरान की राजधानी तेहरान में आयोजित इस्लामिक कॉन्फ्रेंस में खामेनी ने कहा कि ईरान का लक्ष्य इजरायल को नष्ट करना है लेकिन हम यहूदियों को नष्ट नहीं करना चाहते. उन्होंने कहा कि एक मुल्क के रूप में इस्राइल को नष्ट करने का मतलब यहूदियों को नष्ट करना नहीं है. खेमानी ने कहा कि इसका मतलब यह है कि फलस्तीन के लोग फिर चाहे वो मुसलमान, ईसाई या यहूदी हों- उन्हें अपनी सरकार को चुनना चाहिए. इसके अलावा खामेनी की तरफ से पश्चिमी मुल्कों की भी आलोचना की गई, जो लगातार ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए प्रयास करते रहते हैं.

गौरतलब है कि साल 1979 में ईरान में हुई कथित इस्लामिक क्रांति ने कट्टरपंथियों को सत्ता में आने का मौका दिया और तभी से ईरानी नेता इस्राइल को मिटाने की बात करते रहे हैं. ईरान शुरू से ही इस्राइल के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता है और उसका कहना है कि इस्राइल ने मुसलमानों की जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है. ईरान की तरफ से लगातार  इजरायल विरोधी फिलिस्तीनी इस्लामिक चरमपंथी समूहों को समर्थन किया जाता रहा है. इजरायल भी लगातार यह कहता रहा है कि ईरान उसे नष्ट करना चाहता है और मध्य पूर्व में वह उसे अपना प्रमुख दुश्मन मानता है.


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