आज पूरा हुआ बलिदानी श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना.. आज से खुलकर बोलिए कि- “जहां हुए बलिदान मुखर्जी…”


आखिरकार आज अमर बलिदानी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का वो सपना पूरा हो गया है जिसके लिए उन्होंने अपने प्राणों का बलिदान कर दिया गया था. जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद आज से अर्थात 31 अक्टूबर से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो नए केंद्र शासित प्रदेश अस्तित्व में आ गये हैं. जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक, 2019 के मुताबिक जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो केंद्रशासित प्रदेश में बंट गए. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार देर रात इसकी अधिसूचना जारी की. इसके बाद अब खुलकर बोला जा सकता है कि “जहाँ हुए बलिदान मुखर्जी वो कश्मीर हमारा है.”

बता दें कि 5 अगस्त को सरकार ने संसद में जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 और 35A हटाने का फैसला लिया था. इसके अलावा राज्य का दर्जा समाप्त कर उसे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के तौर पर दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजन का ऐलान किया गया था. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख रात को 12 बजे के बाद से यूनियन टेरिटरी बन गए. जम्मू-कश्मीर का अब कोई अलग झंडा और संविधान नहीं होगा. दोनों केंद्र शासित प्रदेशों के गठन के साथ ही देश में अब राज्यों की संख्या 28 रह गई है, जबकि केंद्र शासित प्रदेश 9 हो गए हैं.

केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में गिरीश चन्द्र मुर्मू और लद्दाख में आरके माथुर को उपराज्यपाल के तौर पर नियुक्त किया है. लद्दाख के उपराज्यपाल के तौर पर माथुर ने शपथ ले ली है. कुछ ही देर में मुर्मू भी एक अलग समारोह में शपथ लेंगे. इस फैसले को लागू करने के लिए सरकार ने 31 अक्टूबर यानी सरकार वल्लभ भाई पटेल की जयंती को चुना. इस दिन को सरकार राष्ट्रीय एकता दिवस के तौर पर मना रही है. सरदार पटेल ने देश की आजादी के बाद 560 रियासतों के भारतीय संघ में विलय में अहम भूमिका अदा की थी.

दिल्ली मॉडल पर होगी UT जम्मू-कश्मीर की सरकार

नए केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में राज्य सरकार के संवैधानिक अधिकार और स्थिति कमोबेश दिल्ली या फिर पुदुचेरी सरीखे होंगे. सीएम अपनी कैबिनेट में अधिकतम 9 मंत्रियों को शामिल कर सकेंगे. इसके अलावा सरकार के किसी भी प्रस्ताव को लागू करने के लिए उपराज्यपाल की मंजूरी जरूरी होगी. अब विधानसभा का कार्यकाल 5 साल का ही होगा. अभी तक 370 के कारण जम्मू-कश्मीर राज्य विधानसभा का कार्यकाल 6 साल का होता था. उपराज्यपाल सीएम की ओर से भेजे किसी भी प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए बाध्य नहीं होंगे.

बिना विधानसभा का UT होगा लद्दाख

जम्मू-कश्मीर से उलट लद्दाख में कोई विधानसभा नहीं होगी. यहां कुछ हद तक चंडीगढ़ जैसी व्यवस्था लागू की गई है. यहां लोकसभा की एक सीट होगी, स्थानीय निकाय होंगे, लेकिन विधानसभा की व्यवस्था नहीं होगी. राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के तौर पर उपराज्यपाल यहां व्यवस्था संभालेंगे और संवैधानिक मुखिया होंगे.

प्रस्तावित परिसीमन के मुताबिक केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर की विधानसभा में 7 सीटें बढ़ सकती हैं. 7 सीटें बढ़ने पर केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर की विधानसभा में 90 सीटें हो जाएंगी. माना जा रहा है कि जम्मू के इलाके की सीटें बढ़ेंगी, क्योंकि हमेशा से ये कहा जाता रहा है कि जम्मू को पूरा प्रतिनिधित्व नहीं मिलता है. जम्मू संभाग की आबादी 69 लाख है, और वहां से 37 सीटें हैं जबकि कश्मीर घाटी की आबादी 53 लाख है, और वहां से 43 सीटें हैं.

आज आधी रात से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो केंद्र शासित प्रदेश बन चुके हैं. अब जम्मू-कश्मीर में 20 और लद्दाख में 2 जिले होंगे. अब केंद्र के 106 कानून भी इन दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में लागू हो गए, जबकि राज्य के पुराने 153 कानून खत्म हो गए. इसके अलावा अनुच्छेद 370 की वजह से जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष राज्य के दर्जे से यहां 153 कानून लागू थे, जो अब खत्म हो जाएंगे.


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