टीपू सुल्तान की जयंती पर फिर से विचार करे भाजपा सरकार – कर्नाटक हाईकोर्ट


अभी हाल में ही तमाम अन्य महापुरुषों और देशभक्तों की जयंती आदि आई और बीत गईं लेकिन एक जयंती जो वर्षो से अब तक चर्चा में है उसका नामा टीपू जयंती है . वो टीपू जिसके नाम में सुल्तान भी लगता है और इतिहास की कई किताबों में ये साफ साफ लिखा गया है की उसने हिन्दू समाज के लोगों का एक ही नहीं बल्कि कई बार सामूहिक कत्लेआम करवाया है… उसी टीपू की जयंती जब शुरू की गई थी तब विवाद हुआ था और अब जब बंद करवाई गई तब फिर से विवाद हो रहा है .

विदित हो की वीर सावरकर जी की मूर्ति को अपमानित करने वाली सोच के लोगों ने टीपू जयंती को इतनी गम्भीरता से ले लिया है कि वो सरकार के खिलाफ अदालत तक चले गये और उस से भी ख़ास बात ये है की टीपू जयंती पर फिर से फैसला करने के लिए अदालत ने भी सरकार को एक तय समय दे दिया है .. २ माह में अब कर्नाटक की येदुरप्पा सरकार को फैसला करना है कि उन्होंने टीपू जयंती को बंद कर के अच्छा किया या नहीं और क्या वो फिर से शुरू करेगी ?

कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अभय श्रीनिवास ओका और जस्टिस एस आर कृष्णकुमार की खण्डपीठ ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि मुख्यमंत्री येदियुरप्पा का ये फैसला प्रथम दृष्टया पक्षपातपूर्ण लगता है, कोर्ट ने कहा कि जो लोग 10 नवम्बर को टीपू जंयती का आचरण करेंगे उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की होगी। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2020 के तीसरे सोमवार तक टाल दी और सरकार को कहा कि वो अपने फैसले पर पुनर्विचार करे और इस बात का ध्यान रखे कि बाकी 28 हस्तियों की जयन्ती मनाने वाली सरकार को सिर्फ टीपू सुल्तान की जयन्ती मनाने पर ही क्यों आपत्ति है।


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