भारत से 4 हजार किलोमीटर दूर वो कौन सी जगह है जहां कश्मीर मुद्दे पर लड़ा जा रहा है चुनाव ?


कश्मीर.. भारतमाता का मणिमुकुट कश्मीर, जहाँ से 5 अगस्त 2019 को धारा 370 हटाई गई, जिसे लेकर देश की सियासत अभी तक थमी नहीं है. लेकिन कश्मीर को लेकर सियासत सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है बल्कि भारत से 4 हजार किलोमीटर दूर एक देश में भी कश्मीर के मुद्दे पर चुनाव लड़ा जा रहा है. ये देश है ब्रिटेन जहाँ के आम चुनावों में कश्मीर का मुद्दा जोर शोर से छाया हुआ है तथा जीत दर्ज करने के लिए कंजरवेटिव और लेबर पार्टी जोर-शोर से जुटी हुई है.

बता दें कि यहां भारतीय मतदाताओं की तादात अच्छी खासी है जो किसी भी प्रत्याशी के पक्ष में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं. इसीलिये दोनों पार्टियां भारतीय मतदाताओं को लुभाने के लिए भी तरह-तरह के हथकंडे अपना रही हैं. एक तरफ जहां लेबर पार्टी भारत सरकार द्वारा कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का विरोध कर रही है वहीं, कंजरवेटिव पार्टी ने आधिकारिक रूप से इस विषय पर कुछ भी करने से इंकार किया है लेकिन वह भारत सरकार के इस फैसले के समर्थन में है.

ब्रिटेन की लेबर पार्टी के कश्मीर मुद्दे पर अपनाए गए रूख का विरोध पूरा भारतीय समुदाय कर रहा है. ब्रिटिश हिंदू मतदाताओं के एक बड़े वर्ग ने लेबर पार्टी को वोट देने से इंकार कर दिया है. बता दें कि सितंबर महीने में लेबर पार्टी ने एक आपात प्रस्ताव पेश कर भारत के कदम की आलोचना की थी. लेबर पार्टी ने अपने प्रस्ताव में कहा था कि एक अंतरराष्ट्रीय दल को कश्मीर में जाकर वहां की जमीनी हालात का जायजा लेना चाहिए. लेबर पार्टी ने भारत सरकार पर जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकार हनन का भी आरोप लगाया था. इसके अलावा उन्होंने घाटी के राजनेताओं को नजरबंद किए जाने और इंटरनेट बंद करने पर भी भारत की आलोचना की थी.

इसके बाद ब्रिटेन में रहने वाला भारतीय समुदाय बुरी तरह से भड़क उठा था तथा लेबर पार्टी के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया. अब जब चुनावों में ब्रिटिश भारतीयों ने लेबर पार्टी को वोट करने से इंकार कर दिया है, जिसके कारण लेबर पार्टी के होश उड़े हुए हैं. भारतीय समुदाय द्वारा विरोध किए जाने के बाद से लेबर पार्टी ने सफाई भी दी थी. उन्होंने कहा कि कश्मीर मसले को वह भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मामले के रूप मे देखता है.

भारतीय समुदाय से जुड़े कुछ संगठन वोटरों पर असर डालने के लिए सोशल मीडिया पर संदेश भेज रहे हैं. इन संदेशों में कहा जा रहा है कि विपक्षी लेबर पार्टी 370 को हटाने के भारत के फैसले के खिलाफ पाकिस्तान के दुष्प्रचार का आंख मूंदकर समर्थन कर रही है. लेबर पार्टी को लंदन में पाकिस्तान के समर्थन में हुए प्रदर्शनों की आलोचना न करने पर हिन्दू विरोधी भी कहा जा रहा है. भारतीय ब्रिटिश वोटरों के रुख को देख लेबर पार्टी सफाई जरूर दे रही है लेकिन इसका असर पड़ता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है.


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