“दिशा बिल” अब बिल से खोजकर निकालेगा बलात्कारियों को और ले जाएगा उन्हें 21 दिन में फांसी के तख्ते पर


तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में महिला डॉ. दिशा के साथ गैंगरेप, बर्बरतापूर्वक ह्त्या तथा शव को जलाने के बाद पूरा देश आक्रोशित होकर सड़कों पर आ गया था. लोग एक सुर में महिला शक्ति के साथ हैवानियत तथा दुष्कर्म करने वालों को फांसी की सजा की मांग कर रहे थे. इसके बाद हैदराबाद पुलिस ने एनकाउंटर डॉ. दिशा के दरिंदों को मार गिराया था. अब तेलंगाना के पड़ोसी राज्य आंध्रप्रदेश ने बलात्कार के खिलाफ एक ऐसे क़ानून को बनाया है जो हैवानों को 21 दिन के अंदर फांसी की सजा सुनाएगा.

खबर के मुताबिक़, आंध्र प्रदेश विधानसभा ने बलात्कार के खिलाफ जो विधेयक पास किया है उसे “आंध्र प्रदेश दिशा विधेयक” नाम दिया है. इस विधेयक में महिलाओं के खिलाफ अपराध से जुड़े मामलों का निपटारा 21 दिन के भीतर करने का नियम है और इसमें दोषी को फांसी की सजा भी दी जाएगी. नए कानून का नाम ‘आंध्र प्रदेश दिशा अधिनियम आपराधिक कानून (आंध्र प्रदेश संशोधन) अधिनियम, 2019 रखा गया है. तेलंगाना में पशु चिकित्सक से बलात्कार के बाद उसकी हत्या के बाद यह विधेयक पीड़िता को दी गई श्रद्धांजलि है.

आंध्रप्रदेश के गृह राज्य मंत्री एम सुचरिता ने यह विधेयक विधानसभा में पेश किया जिसे सत्तारूढ़ पार्टी वाईएसआर कांग्रेस ने ‘क्रांतिकारी’ बताया. यह विधेयक ऐसे मामलों में, जहां संज्ञान लेने लायक सबूत मौजूद हों, जांच को सात दिनों में पूरी करने और अगले 14 दिनों में कोर्ट से मुकदमा चलाने का प्रावधान करता है, ताकि 21 दिनों के अंदर सजा दी जा सके. मौजूदा कानून ऐसे मामलों में मुकदमा चलाने के लिए चार महीने का समय देता है.

नए कानून के तहत रिकॉर्ड समय सात दिनों के भीतर यौन अपराधों के मामलों की जांच और चार्जशीट दाखिल करने की तारीख से 14 कार्य दिवसों के भीतर मुकदमे को पूरा करने की बात कही गई है. नए पारित कानून के तहत सजा के खिलाफ अपील को छह महीने के भीतर निपटाना होगा. आईपीसी में तीन नए खंड 354E, 354F और 354G जोड़े जाएंगे जो महिलाओं के उत्पीड़न, बच्चों पर यौन उत्पीड़न और क्रमशः बच्चों पर बढ़ रहे यौन हमले को परिभाषित करते हैं.

इसके अलावा पास हुए इस विधेयक में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अत्याचार के मामलों में मुकदमा चलाने के लिए खास अदालतों के गठन का प्रस्ताव है, जिसे विधानसभा में पास किया गया है. कानून के तहत, सभी 13 जिलों में विशेष अदालतें गठित की जाएंगी, जो बलात्कार, यौन उत्पीड़न, तेजाब हमला और सोशल मीडिया के जरिए उत्पीड़न जैसे महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अत्याचार के मामलों में मुकदमा चलाएंगी.


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