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48 साल पहले आज ही के दिन कराची बन्दरगाह में घुस गई थी भारतीय नौसेना.. तबाही मचा कर मार आई थी कई पाकिस्तानी और १ भी जवान अपना नहीं हुआ था घायल


ये वो दिन था जिसको भले ही पाकिस्तान भुलाने की कोशिश करे लेकिन कभी भुला नहीं पायेगा .. भारत के पराक्रमी वीरों का शौर्य क्या होता है इसको न सिर्फ आज के 48 वर्ष पहले खुद पाकिस्तान ने देखा था बल्कि उस समय उसका साथी अमेरिका भी इसको देख कर हैरान हो गया था. एकदम नया एहसास था पाकिस्तान को युद्ध का क्योकि जमीनी युद्ध में कई बार मार खा लेने के बाद उसने पानी में दो दो हाथ करने का हौसला भरा था जो अचानक ही टूट कर बिखर जैसा गया था..

ये दिन था भारत की नौसेना को विश्व की अग्रणी व् मारक नौसेना में शामिल कर लेने का क्योकि इसके वीरों ने पाकिस्तान के कराची में घुस कर वो दृश्य दुश्मन देश को दिखाया था जो उन्हें आज तक डरने पर मजबूर कर देता है. कराची में घुस कर भारत की नौसेना ने न सिर्फ कराची के बन्दरगाह को तबाह कर दिया था बल्कि उसकी सुरक्षा में तैनात आधे दर्जन पाकिस्तान सैनिको वही ढेर कर दिया था. इसके साथ कई अन्य पाकिस्तानी भी बुरी तरह से घायल हुए थे..

इस महाभियान की सबसे ख़ास बात ये रही थी कि इसमें एक भी भारतीय सैनिक घायल भी नहीं हुआ था जो उनकी उच्चतम कोटि की युद्ध क्षमता को दिखाता है. आज के इतिहास के इस अभियान का नाम आपरेशन ट्राईडेंट था. ये युद्ध सन 1971 में हुआ था जिसमे थलसेना और वायुसेना ने अपनी शानदार मारक क्षमता दिखा कर पाकिस्तान को पहले ही चित्त कर दिया था. आज बारी थी भारत की नौसेना की हिंदुस्तानी फौज ने 3 विद्युत क्‍लास मिसाइल बोट, 2 एंटी-सबमरीन और एक टैंकर के अलावा सुमद्री सुरंगों को बर्बाद करने के लिए 12 जहाज लगाए थे। इस ऑपरेशन को रात में अंजाम देने की योजना बनाई गई थी.

भारतीय नौसैनिकों ने अपने तय योजना के मुताबिक साल 1971 के 3 दिसंबर की रात को पाकिस्तानी नौसेना दफ्तर को निशाना बनाया। इसके बाद भारतीय फौज ने पाकिस्तानी सेना के समुद्री सुरंग आदि को तबाह करना शुरू कर दिया। इस योजना के तहत भारत ने पाकिस्तान के 5 सैनिकों को मार गिराए जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए। इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि इस हमले में भारत के एक भी जवान घायल नहीं हुए।


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