सत्ता के दमन और नोटिसों के बाद भी मुज़फ्फरनगर दंगे में सत्य के साथ खड़ा था सुदर्शन न्यूज.. एक बार फिर से हुआ न्याय और सही साबित हुए हम

ये वो समय था जब सेकुलरिज्म के नाम पर एकतरफा हिन्दू दमन को ही उपलब्धि समझा जाता था. जिन दंगो की शुरुआत अपनी बहन की शिकायत ले कर 2 हिन्दुओ को मार कर वर्ग विशेष द्वारा की गई थी , उन्ही दंगो को आख़िरकार हथियार बना लिया गया था समाज के ध्रुवीकरण का और वोट बैंक के लालच में बर्बाद कर डाला था कई ऐसे युवाओं का जीवन जिनका उस मामले में कोई कसूर ही नहीं था .. मुज़फ्फरनगर दंगो की बात चल रही है यहाँ जिसका जवाब अब तक अखिलेश सरकार देने से बच रही है .

विदित हो कि सुदर्शन न्यूज ने मुज़फ्फरनगर दंगो के समय वो जमीनी सच्चाई दिखाई थी जो तत्कालीन सत्ता के दबाव में कई लोग भय या स्वार्थवश नहीं दिखा पा रहे थे . एकतरफा हिन्दुओ को दोष देने की एक प्रकार से होड़ सी मची थी और उसी समय सुदर्शन न्यूज ने सच दिखाया जिसके बाद हमें नोटिस आदि भी दी गयी .. लेकिन नोटिस हमारे बुलंद इरादों को इंच मात्र भी नहीं हिला पाई और अब वही हुआ है जो न्यायोचित था .. झूठ का मुह काला हुआ है और सच का बोलबाला हुआ है .

ज्ञात हो कि दंगे के नाम पर हिन्दुओ के जीवन को कानूनी रूप से बर्बाद करने की साजिशें आखिरकार दम तोड़ गई हैं .  उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर में 2013 में हुए दंगा के एक मामले में स्थानीय अदालत ने सबूतों के अभाव में 12 लोगों को बरी कर दिया है. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजीव कुमार तिवारी ने मंगलवार को दंगा मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 395 (डकैती) और 436 (आगजनी) से आरोपियों को बरी कर दिया.

लिसाढ़ निवासी मोहम्मद सुलेमान ने 16 सितंबर 2013 को फुगान थाने में आगजनी और डकैती का मामला दर्ज कराया था. उसने गांव के ही नरेंद्र उर्फ लाला, धर्मेंद्र उर्फ काला, बिजेंद्र, राजेंद्र, अनुज, अमित, ब्रम्हा, सुरेंद्र, कृष्णा, निशु, शोकेंद्र, बिट्टू उर्फ अरुण के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था. सबूतों के अभाव में इन सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया. इनके अलावा इस मुकदमे में गठवाला खाप के मुखिया बाबा हरिकिशन को भी नामजद किया गया था जिन्हें SIT ने बरी कर दिया था .

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