Breaking News:

भारत का वो दूसरा कश्मीर जहाँ 40 हजार हिन्दुओं के घर को धू-धू कर जला डाला गया.. मजबूर किया प्रदेश छोड़ने को


कश्मीर में हिन्दुओं के साथ इस्लामिक चरमपंथियों ने क्या किया था, वो बताने की आवश्यकता नहीं है लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के अंदर एक अन्य दूसरा कश्मीर भी है जहाँ 40 हजार से ज्यादा हिन्दुओं के घरों को जला डाला गया था. स्थिति इतनी भयावह थी कि हिन्दुओं को प्रदेश छोडकर दूसरे राज्य में शरण लेनी पड़ी तथा ये हिन्दू आज भी अपने ही देश में शरणार्थी की जिन्दगी जीने को मजबूर हैं. हिन्दुओं पर ये जुल्म कश्मीर की तरह जिहाद के नाम पर चरमपंथियों ने नहीं बल्कि ईसाई उन्मादियों ने ढहाए थे.

ये घटना है नार्थ ईस्ट के राज्य मिजोरम की. जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद अब वहां शांति आ चुकी है लेकिन पूर्वोत्तर भारत का राज्य मिजोरम अब दूसरा कश्मीर बन चुका है. जानकारी के मुताबिक़, यहां पर धर्म परिवर्तन कर ईसाईयों ने हिन्दू ब्रू (रियांग) जनजाति के घर जलाकर उन्हें मिजोरम से भगा दिया ​था. ये लोग पिछले 22 सालों से पड़ोसी राज्य त्रिपुरा में बने शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं. अपने ही देश में शरणार्थी बन चुके इन लोगों के पास ना तो आधार कार्ड है और ना वोटर आईडी. इनको वोट देने का अधिकार भी नहीं है.

हिन्दुओं की ब्रू जनजाति पर हुए अत्याचार की दास्तां यहीं नहीं रूकती बल्कि इनके रहने की जगहों पर न बिजली है और ना ही इनके बैंक खाते हैं. यह बात हाल ही में एबीडीपीएफ के अध्यक्ष ए स्वजबुंग, बीटीडीएस के अध्यक्ष विपिन कुमार मिसा, एमबीआईडीएम के सचिव फिलिप अपेटो और भारत हित रक्षा मंच के झारखंड और बिहार का दायित्व संभाल रहे विशाल बिंदल ने कही है।=. इन लोगों ने केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार से मांग की है कि इनको स्वायत्तशासी जिला परिषद (एडीसी) के तहत फिर से अपने गृह राज्य मिजोरम में बसाया जाए.

जानकारी के मुताबिक़, कि मिजोरम में 2 ही सबसे बड़ी जनजातियां जिनमें पहली मिजो और दूसरी ब्रू (रियांग) है। मिजो जनजाति ने 19वीं शताब्दी के बाद से ईसाई धर्म लिया जबकि ब्रू (रियांग) आज भी वैष्णव हिंदू हैं. साल 1998 में ब्रू (रियांग) जनजाति के लोगों पर सामूहिक रूप से ईसाई मिजो जनजाति के लोगों ने हमला करके उनके घर जला दिए थे. इतना ही नहीं बल्कि उनकी सामूहिक रूप से हत्याएं भी की गईं थी. इस कारण ये लोग मिजोरम से भागकर पड़ोसी राज्य त्रिपुरा के कंचनपुर व पानी सागर जिलों में आ बसे.

सरकार ने यहां पर इन लोगों के लिए शरणार्थी शिविर लगाए. तब से यहां रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सरकार की तरफ से 600 ग्राम चावल और 5 रुपए दिए जाते है जबकि अवयस्क को इससे ठीक आधा 300 ग्राम चावल और 2.5 रुपए सरकार की तरफ से दिए जाते हैं. हालांकि इन लोगों को फिर से मिजोरम में बसाने का प्रयास किया गया जिसके तहत कुछ लोग वहां पर रहने के लिए चले भी गए. लेकिन एक युवक की हत्या के बाद वहां पर फिर से माहौल बिगड़ गया और और हिंदू समुदाय के लोगों के घर जला दिए गए.

पता चला है कि त्रिपुरा में निर्वासित रूप से रह रहे हिन्दू ब्रू (रियांग) जनजाति के 45000 लोगों के पास आधार कार्ड भी नहीं हैं. इनको मतदान करने का अधिकार भी नहीं है. अब इन लोगों ने केंद्र सरकार से उनके उनको गृहराज्य में बसाने तथा उनको आवास और जीवन यापन के लिए खेती करने लायक जमीन प्रदान करने की मांग की है.


सुदर्शन के राष्ट्रवादी पत्रकारिता को आर्थिक सहयोग करे और राष्ट्र-धर्म रक्षा में अपना कर्त्तव्य निभाए
DONATE NOW

Share