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देवभूमि मुक्त होगी घुसपैठियों से… उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के बयान का हर तरफ समर्थन

लंबे समय से मजहबी संक्रमण से जूझ रही देवभूमि उत्तराखंड से बड़ी खबर सामने आई है. खबर के मुताबिक़, असम NRC की तर्ज पर देवभूमि उत्तराखंड में भी NRC लागू करने की योजना तैयार की जा रही है. इसकी जानकारी स्वयं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दी है. उत्तराखंड में NRC लागू किये जाने के उत्तराखंड के सीएम के बयान का हर ओर स्वागत किया जा रहा है.

कार्यक्रम के दौरान एनआरसी को लागू करने के संकेत देते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड सामरिक लिहाज से संवेदनशील है, ऐसे में एनआरसी होना जरूरी है. मंत्रिमंडल में चर्चा कर इसे लागू करने को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा. बता  दें कि उत्तराखंड में बड़ी संख्या में बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं के ठिकाने होने की बात होती रही है. ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार जनपद इसको लेकर संवेदनशील बताए जाते हैं. कई सामाजिक तथा हिन्दू संगठन इसे लेकर चिंता जाहिर कर चुके हैं कि देवभूमि में मजहबी उन्मादी संक्रमण बढ़ रहा है, जिसे रोका जाना जरूरी है.

उत्तराखंड में NRC लागू किये जाने की संभावनाओं को उस समय और बल मिला जब त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के दो कैबिनेट मंत्रियों ने मुख्यमंत्री की बात का समर्थन किया. मंत्रियों ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है और इसकी गरिमा और संस्कृति की रक्षा के लिए यदि राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर लागू करने पर विचार हो रहा है तो ये स्वागत योग्य है. दोनों ही मंत्रियों ने कहा कि प्रदेश मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री जब ये प्रस्ताव लाएंगे तो वे इसका समर्थन करेंगे.

उत्तराखंड के विद्यालयी शिक्षा मंत्री अरविंद पाण्डेय ने कहा है कि ये बात सबको समझने की आवश्यकता है. खतरा महसूस तो नहीं हुआ है लेकिन ये हकीकत है कि जहां शांत होता है, वहीं अपराध के पलने की संभावना होती है. हिमालय प्रदेश है हमारा. दुर्गम क्षेत्र हैं. मूल निवासी होते हुए हम नहीं जा सकते. क्या गारंटी है कि हिंदुस्तान का बड़े से बड़ा अपराधी यहां बैठा हो. देवभूमि की गरिमा को बनाए रखने के लिए एनआरसी बहुत आवश्यक है. मुख्यमंत्री के बयान का पुरजोर समर्थन करता हूं.

वहीं राज्य के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि अगर थोड़ा असम को अध्ययन करें तो वहां बहुत से बाहर के लोग बसें हैं. यहां उत्तराखंड में बाहर के लोग न आएं, ये मुख्यमंत्री तय करेंगे. सतपाल महाराज ने कहा कि हमारे यहां बाहर के लोग आ रहे हैं. इससे यहां के ताने बाने में बदलाव आ रहा है. ये यथावत रहे संस्कृति रक्षा हो, उस पर विचार विमर्श होना चाहिए. इस पर मुख्यमंत्री जो भी तय करेंगे, हम उनके साथ हैं.

वहीं भाजपा नेता व पूर्व दायित्वधारी अजेंद्र अजय ने उत्तराखंड में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) लागू करने के मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन करते हुए कहा है कि देवभूमि के वैशिष्टय को कायम रखने और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एनआरसी जरूरी है. उन्होंने प्रदेश के पर्वतीय भूभाग में जमीन की खरीद फरोख्त पर प्रतिबंध लगाने और उसे विशेष क्षेत्र अधिसूचित करने की मांग की. उन्होंने कहा कि सामरिक दृष्टि से उत्तराखंड का यह हिमालयी क्षेत्र बेहद संवेदनशील है.

अजेन्द्र अजय ने कहा है कि पर्वतीय क्षेत्र के निवासियों की विशिष्ट भाषाई व सांस्कृतिक पहचान रही है. अत्यंत संवेदनशील सीमा के निकट लगातार बदल रहा सामाजिक ताना बाना खतरे का कारण बन सकता है. इससे असम जैसे हालात पैदा हो सकते हैं. यह भूभाग आदिकाल से सनातन धर्म की आस्था और हिंदू की प्रेरणा रहा है. पवित्रता व उसके आध्यात्मिक व सांस्कृतिक स्वरूप को बरकरार रखने के लिए संपूर्ण पर्वतीय क्षेत्र को विशेष क्षेत्र के रूप में अधिसूचित किया जाना चाहिए.

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