छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती विशेष- हत्यारे अफजल की आतें निकाल कर भविष्य में आने वाले मक्कारों और गद्दारों के खिलाफ स्पष्ट संदेश - Hindi News, हिंदी समाचार, Samachar, Breaking News, Latest Khabar -

छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती विशेष- हत्यारे अफजल की आतें निकाल कर भविष्य में आने वाले मक्कारों और गद्दारों के खिलाफ स्पष्ट संदेश


शिवाजी के जीवन की सबसे चर्चित और महत्वपूर्ण घटना थी. सन् 1659 में बीजापुर की बड़ी साहिबा ने अफज़ल खान को 10 हज़ार सैनिकों के साथ शिवाजी राजे पर आक्रमण करने के लिए भेज दिया. ऐसा माना जाता है कि अफज़ल खान शिवाजी से दो गुना शक्तिशाली था. लेकिन शक्ति से ही सबकुछ नहीं होता. बुद्धिमत्ता ही मनुष्य की सबसे बड़ी पूँजी है. अफज़ल खान बहुत निर्दयी था. अफज़ल खान ने युद्ध से पहले बीजापुर से प्रतापगढ़ किले तक कई मंदिरों को तोड़ा और कई बेगुनाह लोगों को मारा डाला. उसने सोचा की अगर मैं मंदिर तोड़ दूंगा तो शिवाजी बाहर आयेंगे. हुआ भी ऐसा ही शिवाजी महाराज की सेना ने अफज़ल खान से छापामार तरीके से युद्ध लड़ा.

अफज़ल खान को युद्ध में शिवाजी का पलड़ा भारी नज़र आया तो उसने युद्धविराम देकर शिवाजी के सामने मुलाकात का प्रस्ताव रखा. भोजन समाप्त होने के बाद अफज़ल खान शिवाजी से गले मिलने के बहाने चाकू मारना चाहता था लेकिन शिवाजी ने लोहे से बना कवच पहन रखा था. जिसमे से चाकू आर-पार नहीं हो सका था. इस साजिश का अंदेशा होते ही शिवाजी ने अपने खंजर से अफज़ल खान को मार डाला.अफज़ल खान के बाद रुस्तम ज़मान और सिद्दी जोहर को भी शिवाजी महाराज ने युद्ध में हरा दिया था. जब बीजापुर सल्तनत के पास कोई सक्षम योद्धा नहीं बचा तो बीजापुर की बड़ी बेग़म ने छठे मुग़ल शासक औरंगजेब से मदद मांगी की वे शिवाजी के खिलाफ बीजापुर सल्तनत के लिए कुछ करें.

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ये मांग असल मे अपने मत मज़हब आदि की भावना से की गई थी जिसको क्रूर मतान्ध और हिंदुओं के हत्यारे औरंगजेब ने तुरन्त मान लिया क्योंकि युद्ध एक हिन्दू सम्राट के विरुद्ध था..औरंगजेब ने विनती स्वीकारते हुए अपने मामा शाइस्ता खान को एक लाख पचास हज़ार सैनिकों के साथ युद्ध के लिए भेज दिया. सेना ने पुणे पर हमला कर कब्ज़ा कर लिया. शाइस्ता खान ने छत्रपति शिवाजी महाराज के निवास लाल महल पर कब्ज़ा जमा लिया. जब शिवाजी राजे को ये सूचना मिली तो वे अपने 400 सैनिकों के साथ बाराती बन कर पुणे में गए. पुणे जाकर सेना ने रात में लाल महल में प्रवेश किया. जिस समय शाइस्ता खान की सेना आराम कर रही थी तब शिवाजी की सेना ने शाइस्ता खान और कुछ जागे हुए सिपाहियों पर लाल महल में हमला कर दिया. महल के अन्दर की उस लड़ाई में शाइस्ता खान भाग निकला लेकिन शिवाजी राजे ने तलवार से शाइस्ता खान की 3 उंगलियाँ काट दी थी. और युद्ध शाइस्ता खान हार गया.

शाइस्ता खान को हराने के बाद शिवाजी का युद्ध मुग़ल शासक औरंगजेब द्वारा भेजे गए एक गद्दार जय सिंह से हुआ. इस युद्ध में सामने एक गद्दार ही सही पर हिन्दू देख कर शिवाजी ने खुद ही कम रक्तपात किया और शिवाजी महराज को मुग़ल सल्तनत को 23 किले देने पड़े. हार के कुछ सालों बाद ही शिवाजी ने युद्ध कर के अपने सभी 23 किले वापस जीत लिये थे. उस समय औरंगजेब के पास जयसिंह नहीं था. तो उसने अपने 2 योद्धा दाउद खान और मोहब्बत खान को शिवाजी को युद्ध में हराने के लिए भेजा पर वे दोनों भी नाकाम हुए. इसी बीच बीजापुर के सुलतान की मौत हो गयी. और बीजापुर सल्तनत कमज़ोर पड़ने लगी. 6 जून 1674 को रायगढ़ में वीर छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक हुआ. सदियों बाद भारत में किसी राजा का हिन्दू रीति-रिवाज से राज्याभिषेक हुआ था.


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